काठमांडू, 18 अप्रैल । नेपाल के मुस्तांग जिले के वारागुंग मुक्तिक्षेत्र के छुसॉन्ग में लाल मिट्टी के पहाड़ की दीवार को काटकर बनाई गई गुफाओं के भीतर भी एक गुम्बा (बौद्ध मठ) स्थित है। इस गुम्बा में स्थापित मूर्तियों के इतिहास को समझने पर पता चलता है कि गुफा के अंदर स्थित यह गुम्बा लगभग 1,200 वर्ष से भी अधिक पुराना है।
जोमसोम होते हुए कागबेनी–कोरला सड़क के पास एक खड़ी ढलान पर स्थित इस गुफा के भीतर के गुम्बा को ‘मिन्ची ल्हवंग’ गुम्बा कहा जाता है। यह धार्मिक बौद्ध गुम्बा छुसॉन्ग गांव के छह परिवारों के स्वामित्व में है। यहां प्रतिदिन शाम को इन छह परिवारों के सदस्य बारी-बारी से दीप जलाते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।
कोरला सड़क मार्ग के ऊपर खड़ी ढलान पर स्थित यह गुफा अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थान पर है। स्थानीय लोगों के अनुसार प्राचीन काल में छुसॉन्ग गांव के पूर्वजों ने पहाड़ को काटकर यहां गुम्बा स्थापित किया था। यह गुम्बा वास्तव में कितने वर्ष पुराना है, इसका विवरण वर्तमान पीढ़ी के पास भी नहीं है। प्राचीन काल में मनांग से आए पूर्वज अपने देवता को साथ लेकर छुसॉन्ग गांव में बस गए थे।
स्थानीय निवासी श्याम गुरूंग ने बताया कि कमजोर भौगोलिक संरचना में स्थित यह गुफा स्वयं में जोखिमपूर्ण है। इसके पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसके संरक्षण की जिम्मेदारी इन छह परिवारों पर है। उनके अनुसार पीढ़ियों से ये परिवार गुफा और गुम्बा की देखभाल करते आ रहे हैं।
करीब 100 मीटर ऊंचे मिट्टी के पहाड़ में स्थित इस गुफा को भूस्खलन और बाढ़ से नुकसान पहुंचने का खतरा है, इसलिए संबंधित निकायों को इसके संरक्षण पर ध्यान देना चाहिए। इस पर स्थानीय गुरूंग परिवार ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब तक भगवान की कृपा से गुफा और गुम्बा को कोई क्षति नहीं हुई है।
इस अनोखी गुफा के ऊपरी तल पर गुम्बा स्थापित है। गुम्बा में मिट्टी से बनी बुद्ध की विभिन्न मूर्तियां हैं, जो 800 वर्ष से अधिक पुरानी बताई जाती हैं। एक फ्रेम में रखी हरितारा की पत्थर की मूर्ति को लगभग 1,200 वर्ष पुरानी माना जाता है। मिन्ची ल्हवंग गुम्बा की गुफा के अंदर वर्षों पुराने कलात्मक चित्र भी मौजूद हैं। गुफा के भूगोल के अनुरूप मिट्टी के रंगों से ऊपरी तल की दीवारों और छत पर चित्रकारी की गई है।
स्थानीय गुरूंग के अनुसार गुफा के दूसरे तल के एक कोने में बुद्ध की मूर्तियां रखी गई हैं और वहां परिक्रमा करने की भी व्यवस्था है। इस गुफा और गुम्बा पर कुछ विदेशी शोधकर्ताओं ने भी अध्ययन किया है। संरक्षण के लिए विदेशी संस्थाओं ने तकनीकी और आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया है। छुसॉन्ग की ढलान पर स्थित इस गुफा में पहले और दूसरे तल पर रोशनी के लिए खिड़की जैसे छोटे छेद बनाए गए हैं। गुफा के भूतल से ऊपर जाने के लिए दो लकड़ी की सीढ़ियां हैं, जिनके सहारे ऊपर के तल तक पहुंचा जा सकता है।