April 27, 2026

ओमना बनीं “मिस तिरुनंगई”, हजारों ट्रांसजेंडरों ने लिया भाग

विलुप्पुरम, 27 अप्रैल । तमिलनाडु के विलुप्पुरम जिले में आयोजित प्रसिद्ध “कूवागम उत्सव 2026” (कूवागम उत्सव प्रसिद्ध और अद्वितीय ट्रांसजेंडर उत्सवों में से एक है, जो तमिलनाडु के कल्लाकुरिची जिले के कूवागम गांव में कूथंडावर मंदिर में आयोजित किया जाता है) के दौरान चेन्नई की ओमना को “मिस तिरुनंगई 2026” का खिताब दिया गया।

प्रतियोगिता में चेन्नई की सायश्री ने दूसरा और सुगी ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस आयोजन में एक हजार से अधिक ट्रांसजेंडर लोगों ने भाग लेकर अपनी सांस्कृतिक पहचान, प्रतिभा और सामाजिक सहभागिता का प्रदर्शन किया।

विलुप्पुरम के निकट स्थित कूथांडवर मंदिर में हर वर्ष कूथांडवर मंदिर उत्सव के अवसर पर तिरुनंगई (ट्रांसजेंडर) समुदाय की ओर से विविध सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी परंपरा के तहत इस वर्ष राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर महासंघ और चेन्नई की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में “कूवागम उत्सव 2026” का आयोजन किया गया।

शनिवार रात (26 अप्रैल) को विलुप्पुरम के नए बस स्टैंड के पास नगर पालिका मैदान में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत तमिलनाडु सरकार द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए किए गए कल्याणकारी कार्यों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन से हुई।

इसके बाद शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की विशेष परेड निकाली गई, जिसने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। साथ ही नृत्य, लोककला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को उत्साहपूर्ण बना दिया।

मुख्य आकर्षण “मिस तिरुनंगई 2026” प्रतियोगिता रही, जिसमें बड़ी संख्या में ट्रांसजेंडर प्रतिभागियों ने आकर्षक पारंपरिक और आधुनिक वेशभूषा में भाग लिया। कई चरणों में आयोजित इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास, व्यक्तित्व, प्रतिभा और प्रस्तुति के आधार पर अपनी पहचान बनाई।

कड़े मुकाबले के बाद चेन्नई की ओमना को वर्ष 2026 की “मिस तिरुनंगई” घोषित किया गया। सायश्री को द्वितीय और सुगी को तृतीय स्थान मिला। विजेताओं के नाम की घोषणा होते ही कार्यक्रम स्थल तालियों और उत्साह से गूंज उठा।

राज्य के पूर्व मंत्री के. पोनमुडी ने भी कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जिन्हें पहले ‘तीसरा लिंग’ कहा जाता था, उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि ने ‘तिरुनंगई’ जैसा सम्मानजनक नाम दिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2008 में ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की स्थापना भी करुणानिधि के कार्यकाल में ही हुई थी।

पोनमुदी ने कहा कि ट्रांसजेंडर समाज से अलग-थलग रखने वाले नहीं हैं, बल्कि उन्हें समानता और सम्मान के साथ समाज का अभिन्न हिस्सा बनकर जीने का अधिकार है। उन्होंने सामाजिक स्वीकार्यता और समान अवसरों की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि कूवागम उत्सव न केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यह ट्रांसजेंडर समुदाय के सम्मान, पहचान और अधिकारों का भी एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। “मिस तिरुनंगई” जैसी प्रतियोगिताएं समाज में सकारात्मक बदलाव और समावेशिता का संदेश देती हैं।

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