May 14, 2026

भारत में थोक महंगाई दर अप्रैल महीने में तेज बढ़ोतरी के साथ 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई

भारत में थोक महंगाई दर (Wholesale Inflation) अप्रैल महीने में तेज बढ़ोतरी के साथ 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले 42 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। यह वृद्धि मुख्य रूप से ईंधन, कच्चे तेल और संबंधित उत्पादों की कीमतों में तेज उछाल के कारण दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, होलसेल प्राइस इंडेक्स (Wholesale Price Index) मार्च में 3.88 प्रतिशत पर था, लेकिन अप्रैल में यह दोगुने से भी अधिक बढ़कर 8.3 प्रतिशत तक पहुंच गया। इस तेज वृद्धि ने बाजार और आर्थिक विश्लेषकों की चिंता बढ़ा दी है।

महंगाई में इस उछाल का सबसे बड़ा कारण कच्चे पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और खनिज तेलों की कीमतों में भारी वृद्धि है। इसके अलावा धातुओं और तैयार उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसने समग्र थोक महंगाई को और ऊपर धकेल दिया है। आंकड़ों के अनुसार, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की महंगाई दर मार्च के 35.98 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 67.18 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह वृद्धि ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते दबाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

इसी तरह अकेले कच्चे पेट्रोलियम की महंगाई में भी जबरदस्त उछाल देखा गया है, जो मार्च में 51.57 प्रतिशत थी और अप्रैल में बढ़कर 88.06 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह स्तर हाल के वर्षों में सबसे तेज वृद्धि में से एक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण भारत में भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर घरेलू थोक महंगाई पर तुरंत दिखाई देता है।

इसके अलावा धातु और विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में वृद्धि ने भी महंगाई दर को ऊपर बनाए रखने में योगदान दिया है। उत्पादन लागत बढ़ने के कारण उद्योगों पर दबाव बढ़ा है, जिसका असर आगे चलकर उपभोक्ता कीमतों पर भी पड़ सकता है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि थोक महंगाई में यह तेजी आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई (CPI) पर भी असर डाल सकती है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है। फिलहाल सरकार और नीतिगत संस्थाएं स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। ऊर्जा कीमतों में स्थिरता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सुधार आने पर ही महंगाई में राहत की उम्मीद की जा सकती है।

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