May 16, 2026

विश्व आईबीडी दिवस पर आईएमएस-बीएचयू में जन जागरूकता अभियान, 300 से अधिक मरीज होंगे शामिल

वाराणसी, 16 मई । विश्व आईबीडी दिवस पर 19 मई को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान अंतर्गत गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में जन जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। विभाग की ओर से डॉक्टर लाउंज में अपराह्न एक बजे से इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (आईबीडी) जैसे गंभीर एवं जटिल रोगों पर प्रतिवर्ष की भांति चर्चा होगी। इस आयोजन में 300 से अधिक मरीजों एवं उनके परिजनों के सम्मिलित होने की संभावना है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज जैसे गंभीर एवं जटिल रोगों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, समय पर पहचान एवं आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी आमजन तक पहुँचाना है।

शनिवार को गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. देवेश प्रकाश यादव और विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एस.के. शुक्ला ने यह जानकारी दी। उन्हाेंने बताया कि कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चर्तुवेदी, विशिष्ट अतिथि आईएमएस के निदेशक डॉ. एसएन शंखवार, चिकित्सा संकाय के अधिष्ठाता डॉ. संजय गुप्ता, सर सुंदरलाल चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. के.के. गुप्ता भी शामिल होंगे। विभाग के सीनियर रेजिडेंट्स, शोधार्थियों एवं चिकित्सा कर्मियों की मौजूदगी में मरीजों को तनाव कम करने, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद एवं समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने की आवश्यकता पर भी जागरूक किया जाएगा। कार्यक्रम में रोगियों एवं उनके परिजनों के लिए प्रश्नोत्तर सत्र, परामर्श शिविर एवं स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों का भी आयोजन किया जाएगा।

विभागाध्यक्ष के अनुसार, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में संचालित विशेष आईबीडी क्लिनिक में अब तक लगभग 2000 मरीज पंजीकृत हो चुके हैं। यह क्लिनिक वर्ष 2018 से उनके नेतृत्व में निरंतर संचालित किया जा रहा है। पूर्वांचल एवं आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज यहाँ उपचार हेतु पहुँचते हैं। यह क्लिनिक आधुनिक जाँच, परामर्श एवं उन्नत उपचार सुविधाओं के कारण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका है। बताया गया कि आईबीडी मुख्यतः आंतों में सूजन से संबंधित बीमारी है, जिसमें लगातार पेट दर्द, दस्त, कमजोरी, वजन कम होना एवं मल में रक्त आने जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। समय पर उपचार न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

कार्यक्रम में आधुनिक उपचार पद्धति फीकल माइक्रोबाॅयोटा ट्रांसप्लांटेशन (एफएमटी) के महत्व पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ बताएंगे कि एफएमटी आंतों में स्वस्थ बैक्टीरिया संतुलन स्थापित कर रोगियों को लाभ पहुँचाने वाली एक उन्नत चिकित्सा तकनीक है, जो आईबीडी सहित कई जटिल आंत्र रोगों में प्रभावी सिद्ध हो रही है। कार्यक्रम के दौरान मरीजों के लिए उचित खान-पान एवं जीवनशैली पर भी विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बताया जाएगा कि रोगियों को हल्का, सुपाच्य एवं पौष्टिक भोजन लेना चाहिए। ताजे फल, उबली हुई सब्जियाँ, दही, पर्याप्त पानी एवं प्रोटीनयुक्त आहार लाभकारी हो सकते हैं। वहीं अत्यधिक मसालेदार भोजन, जंक फूड, तली-भुनी चीजें, धूम्रपान, शराब तथा अधिक कैफीनयुक्त पदार्थों से बचने की सलाह दी जाएगी, क्योंकि ये आंतों की सूजन को बढ़ा सकते हैं।

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