बिलासपुर 20 मई। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में चल रही पुलिस कॉन्स्टेबल प्रमोशन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस पीपी साहू ने प्रमोशन प्रक्रिया में अंतिम आदेश जारी करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि प्रमोशन प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन याचिका की अगली सुनवाई तक पदोन्नति आदेश जारी नहीं किए जाएंगे। यह अंतरिम आदेश 72 आरक्षकों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया गया। मामले की अगली सुनवाई अब 15 जून को होगी। दरअसल, प्रदेश के अलग-अलग जिलों में आरक्षकों की प्रमोशन प्रक्रिया जारी है। इस प्रक्रिया में नियमों के पालन नहीं होने का आरोप लगाया गया है। कोरबा जिले के अलग-अलग थानों में पदस्थ आरक्षक लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य समेत कुल 73 पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में राज्य शासन, गृह सचिव, डीजीपी, आईजी बिलासपुर रेंज, एसपी कोरबा समेत अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि पुलिस मुख्यालय ने प्रमोशन प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन इसमें उन आरक्षकों को भी शुरुआती नियुक्ति की तारीख के आधार पर सीनियर मानकर प्रमोशन देने की तैयारी की जा रही है, जिन्होंने अपनी इच्छा से दूसरे जिले में ट्रांसफर कराया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ पुलिस एग्जीक्यूटिव फोर्स कांस्टेबल भर्ती, पदोन्नति, सेवा शर्त नियम 2007 में किए गए संशोधन के अनुसार अगर कोई कर्मचारी अपनी मर्जी से दूसरे जिले में ट्रांसफर लेता है, तो नए जिले की सीनियरिटी लिस्ट में उसका नाम सबसे नीचे माना जाता है। आरोप है कि मौजूदा प्रमोशन प्रक्रिया में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है।
याचिका में यह भी कहा गया कि यदि इस समय हाईकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिलती, तो नियमों के विपरीत 1 जून 2026 को फाइनल फिट लिस्ट जारी हो जाती। इससे लंबे समय से एक ही जिले में काम कर रहे आरक्षकों का हक मारा जाएगा। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पुलिस मुख्यालय के स्पष्टीकरण पत्र को इस याचिका में चुनौती नहीं दी गई है। सरकार ने यह भी बताया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई याचिकाकर्ताओं के नाम भी फिट लिस्ट में शामिल हो सकते हैं।
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