रुपये में लगातार गिरावट और डॉलर के मुकाबले लगभग 97 के नए निचले स्तर पर पहुंचने के बाद रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने मुद्रा को स्थिर करने के लिए संभावित कदमों पर विचार शुरू कर दिया है। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, केंद्रीय बैंक सभी उपलब्ध विकल्पों का आकलन कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, RBI के शीर्ष अधिकारियों ने इस सप्ताह कई आंतरिक बैठकें की हैं, जिनमें गवर्नर संजय मल्होत्रा भी शामिल रहे। इन बैठकों में रुपये की गिरावट को रोकने और बाजार में स्थिरता लाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
जानकारी के अनुसार, जिन प्रमुख विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें ब्याज दरों में बढ़ोतरी, अधिक करेंसी स्वैप की सुविधा और विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे कदम शामिल हैं। इन उपायों का उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में तरलता बढ़ाना और रुपये पर दबाव कम करना है। एक सूत्र ने बताया कि ब्याज दरों में बदलाव भी एक संभावित विकल्प के रूप में विचाराधीन है। हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय मौद्रिक नीति समिति की आगामी बैठक में लिया जा सकता है, जो 5 जून को निर्धारित है।
यह भी उल्लेखनीय है कि RBI पहले भी परिस्थितियों के अनुसार नीतिगत दरों में अचानक बदलाव कर चुका है, जैसे मई 2022 में एक ऑफ-साइकिल एडजस्टमेंट किया गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, विदेशी पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव और आयात लागत में वृद्धि रुपये पर दबाव बढ़ा रही है। ऐसे में केंद्रीय बैंक के लिए संतुलित नीति बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। फिलहाल RBI की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन बाजार में इस बात की चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में मुद्रा को स्थिर करने के लिए कोई बड़ा कदम उठाया जा सकता है। निवेशक और कारोबारी समुदाय भी आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर नजर बनाए हुए हैं। स्थिति पर अब सभी की निगाहें RBI के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो रुपये की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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