Acidity या पेट में जलन की समस्या आजकल काफी आम हो गई है। कई लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अगर यह परेशानी लगातार बनी रहे तो यह गलत खानपान और खराब लाइफस्टाइल की ओर इशारा कर सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, पेट में ज्यादा एसिड बनने से सीने और गले तक जलन महसूस हो सकती है। इसे आम भाषा में एसिडिटी या हार्टबर्न भी कहा जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अनियमित खाने की आदतें, मसालेदार भोजन, ज्यादा चाय-कॉफी और देर रात भारी खाना खाने से यह समस्या तेजी से बढ़ती है। गर्मियों के मौसम में भी पेट से जुड़ी दिक्कतें अधिक देखने को मिलती हैं, क्योंकि इस दौरान शरीर में पानी की कमी और खानपान की गड़बड़ी पाचन तंत्र को प्रभावित करती है।
तीखा और ज्यादा मसालेदार खाना पेट की अंदरूनी परत पर असर डाल सकता है। लाल मिर्च, काली मिर्च और गरम मसालों का अत्यधिक सेवन पेट में एसिड का स्तर बढ़ा देता है। इससे पेट, सीने और गले में जलन की शिकायत हो सकती है। कई लोग रोजाना बहुत ज्यादा मसालेदार भोजन खाते हैं, जिससे समस्या धीरे-धीरे गंभीर हो सकती है। टमाटर भी एसिडिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल माना जाता है। इसकी प्रकृति एसिडिक होती है। टमाटर को कच्चा, सब्जी, सॉस या कैचअप के रूप में ज्यादा मात्रा में खाने से पेट में जलन और खट्टी डकार जैसी परेशानी हो सकती है। जिन लोगों को पहले से एसिडिटी की शिकायत रहती है, उन्हें टमाटर का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।
कार्बोनेटेड और सॉफ्ट ड्रिंक्स भी पेट की परेशानी को बढ़ा सकते हैं। इन ड्रिंक्स में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड पेट में दबाव बढ़ाता है। इसके कारण पेट का एसिड ऊपर की ओर आने लगता है, जिससे सीने में जलन महसूस होती है। गर्मियों में लोग ज्यादा कोल्ड ड्रिंक पीते हैं, लेकिन लगातार इसका सेवन पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकता है। चाय, कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स जैसे कैफीन युक्त पेय पदार्थ भी एसिडिटी का बड़ा कारण माने जाते हैं। कैफीन पेट में एसिड बनने की प्रक्रिया को तेज करता है। खासतौर पर खाली पेट चाय या कॉफी पीने से जलन की समस्या और बढ़ सकती है। कई लोगों को सुबह खाली पेट चाय पीने की आदत होती है, जो लंबे समय में पाचन संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकती है।
डेयरी प्रोडक्ट्स को कई लोग पेट की जलन कम करने के लिए इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लिए यह फायदेमंद नहीं होता। दूध और ज्यादा फैट वाले डेयरी उत्पाद पाचन को धीमा कर सकते हैं। इससे पेट में भारीपन और एसिड बनने की समस्या बढ़ सकती है। जिन लोगों को लेक्टोज इंटॉलरेंस होता है, उन्हें डेयरी प्रोडक्ट्स से गैस, पेट दर्द और जलन की शिकायत ज्यादा हो सकती है। नॉन-वेज फूड, खासकर ज्यादा तेल और मसालों में बना रेड मीट, पचने में काफी समय लेता है। इससे पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और एसिडिटी बढ़ सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि रात में भारी और ऑयली नॉन-वेज भोजन करने से समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।
गलत लाइफस्टाइल भी पेट की जलन की बड़ी वजह है। देर रात तक जागना, तनाव लेना, समय पर खाना न खाना और खाने के तुरंत बाद लेट जाना पाचन को प्रभावित करता है। कई लोग काम के दबाव में लंबे समय तक भूखे रहते हैं और फिर एक साथ बहुत ज्यादा खाना खा लेते हैं। इससे भी एसिडिटी की परेशानी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पेट में जलन से राहत पाने के लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करना जरूरी है। सबसे पहले खाने का समय नियमित रखना चाहिए। एक बार में ज्यादा खाने के बजाय छोटे-छोटे मील लेना बेहतर माना जाता है। इससे पाचन तंत्र पर दबाव कम पड़ता है। रात में सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए। खाने के तुरंत बाद लेटने से एसिड ऊपर की ओर आ सकता है। सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा रखने से भी राहत मिल सकती है। इसके अलावा शरीर को हाइड्रेट रखना बेहद जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से पाचन बेहतर रहता है। हालांकि खाना खाने के तुरंत बाद बहुत ज्यादा पानी पीने से बचना चाहिए। डॉक्टर यह भी सलाह देते हैं कि धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से दूरी बनानी चाहिए, क्योंकि ये दोनों पेट में एसिड बढ़ाने का काम करते हैं। नियमित व्यायाम और वजन नियंत्रित रखना भी एसिडिटी की समस्या को कम करने में मददगार माना जाता है। अगर पेट में जलन लगातार बनी रहती है, बार-बार खट्टी डकार आती है, उल्टी जैसा महसूस होता है या सीने में तेज जलन होती है तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। लंबे समय तक समस्या रहने पर यह गैस्ट्रिक या पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है।
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