May 28, 2026

अमित बघेल का किया हुआ अपराध गंभीर : हाईकोर्ट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एनके व्यास ने बलौदाबाजार आगजनी कांड पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि आरोपियों ने 7-8 हजार लोगों की भीड़ को भड़काकर 13-14 करोड़ रुपए की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला कराया।

समाज में शांति और कानून व्यवस्था को पूरी तरह से बिगाड़ने वाले ऐसे गंभीर अपराध पर आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। इसके सथ ही हाईकोर्ट ने भीषण बवाल, पथराव और कलेक्टोरेट परिसर में आगजनी के मामले में छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक समेत तीन को जमानत याचिकाएं खारिज कर दी है।

बलौदा बाजार के दशहरा मैदान में 10 जून 2024 को एक सामाजिक मामले में विरोध के लिए हजारों की भीड़ जुटी थी। आरोप है कि वहां छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के पदाधिकारियों ने मंच से भड़काऊ भाषण देकर भीड़ को उग्र कर दिया। इसके बाद हिंसक हुई भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़कर कलेक्टोरेट और एसपी ऑफिस परिसर में घुसकर जमकर तोड़फोड़ की, सैकड़ों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया और कलेक्टोरेट भवन को भी फूंक दिया।

इस दौरान बीच-बचाव और ड्यूटी कर रहे पुलिस अधिकारियों व जवानों पर लाठियों, पत्थरों और लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिसमें कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल, अजय यादव, दिनेश वर्मा समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले में बघेल, यादव और वर्मा ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी लगाई थी।

सुनवाई के दौरान अमित बघेल के वकील ने तर्क दिया कि 10 जून को जब बलौदाबाजार में यह हिंसा हो रही थी, तब दोपहर 12 से 3 बजे के बीच अपनी पत्नी ईश्वरी बघेल द्वारा संजय कुमार सोनी के पक्ष में की जा रही रजिस्ट्री के सिलसिले में रजिस्ट्रार ऑफिस में मौजूद थे।

लेकिन, हाईकोर्ट ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि प्रस्तुत दस्तावेजों में घटना के समय बलौदाबाजार जिले के विभिन्न स्थानों पर हुई हिंसा के दौरान रजिस्ट्रार कार्यालय में अमित बघेल की उपस्थिति का कोई पुख्ता प्रमाण नजर नहीं आता है, इसलिए यह दलील सच्चाई से दूर है।




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