June 09, 2026

एमसीडी ने 596 करोड़ की पांच बड़ी परियोजनाओं को दी मंजूरी : सत्या शर्मा

नई दिल्ली, 09 जून । दिल्ली में कूड़े के नए पहाड़ बनने से रोकने और लैंडफिल स्थलों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए महापौर प्रवेश वाही एवं स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के पांच बड़ी कचरा प्रसंस्करण परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

एमसीडी की स्थायी समिति अध्यक्ष सत्या शर्मा ने मंगलवार को बताया कि भलस्वा, ओखला, सिंघोला, गाजीपुर और नरेला-बवाना में कुल 5900 टन प्रतिदिन क्षमता की आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इन परियोजनाओं पर लगभग 596 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

सत्या शर्मा ने कहा कि निगम पिछले कई वर्षों से राजधानी के तीन प्रमुख लैंडफिल स्थलों पर बायो-माइनिंग के जरिए पुराने कूड़े के पहाड़ खत्म करने का काम कर रहा है। इसके बावजूद प्रतिदिन हजारों टन ताजा कचरा इन स्थलों पर पहुंच रहा है, जिससे नए कूड़ा पहाड़ बनने का खतरा बना हुआ है। इसी चुनौती से निपटने के लिए यह दीर्घकालिक योजना तैयार की गई है।

उन्होंने बताया कि सबसे बड़ी परियोजना भलस्वा लैंडफिल साइट पर स्थापित की जाएगी। यहां 1800 टन प्रतिदिन क्षमता का एकीकृत कचरा प्रसंस्करण संयंत्र विकसित होगा। इस परियोजना की संशोधित लागत 214.50 करोड़ है। उन्होंने कहा कि भलस्वा में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 3500 टन ताजा कचरा पहुंच रहा है। नई सुविधा के शुरू होने के बाद इसका बड़ा हिस्सा वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्कृत किया जा सकेगा।

स्थायी समिति अध्यक्ष ने बताया कि ओखला लैंडफिल साइट पर 1400 टन प्रतिदिन क्षमता का आधुनिक संयंत्र स्थापित किया जाएगा, जिसकी लागत 152.68 करोड़ होगी। सत्या शर्मा ने कहा कि ओखला में बायो-माइनिंग के साथ-साथ ताजा कचरे के निस्तारण की चुनौती भी बनी हुई है। यह परियोजना उस समस्या का स्थायी समाधान देने में मदद करेगी।

उन्होंने बताया कि सिंघोला साइट पर 700 टन प्रतिदिन क्षमता की विशेष सुविधा विकसित की जाएगी, जहां ताजा कचरे के साथ-साथ नालों की सफाई से निकलने वाली गाद (सिल्ट) का भी प्रसंस्करण किया जाएगा। इस परियोजना की लागत 61.26 करोड़ है। उन्होंने बताया कि सिंघोला पहले शाहदरा उत्तर और शाहदरा दक्षिण जोन की गाद डंपिंग के लिए उपयोग किया जाता था, लेकिन अब वहां आधुनिक प्रसंस्करण व्यवस्था विकसित की जाएगी ताकि भविष्य में गाद के बड़े ढेर न बनें।

स्थायी समिति अध्यक्ष ने बताया कि गाजीपुर लैंडफिल से जुड़ी एक नई परियोजना को भी स्वीकृति दी गई है। गाजीपुर में पॉकेट-सी, इंटीग्रेटेड फ्रेट कॉम्प्लेक्स क्षेत्र में 800 टन प्रतिदिन क्षमता की सुविधा विकसित की जाएगी। इस परियोजना पर 83.44 करोड़ खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि निगम का उद्देश्य है कि वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट पूरी क्षमता से शुरू होने तक ताजा कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जाता रहे और नया कूड़ा पहाड़ न बनने पाए।

सत्या शर्मा ने बताया कि नरेला-बवाना में भी 1200 टन प्रतिदिन क्षमता की नई सुविधा विकसित की जाएगी। इस परियोजना की मूल स्वीकृत लागत 84.78 करोड़ है। इससे उत्तरी और बाहरी दिल्ली क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को नई मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया के दौरान कर्नाल, लखनऊ और गाजियाबाद नगर निगमों के सफल मॉडलों का अध्ययन किया गया। इसके बाद भुगतान प्रणाली, तकनीकी मानकों और परिचालन व्यवस्था में आवश्यक बदलाव किए गए ताकि दिल्ली को अधिक प्रभावी और व्यवहारिक मॉडल मिल सके। अब भुगतान प्रसंस्करण संयंत्र में आने वाले कचरे की मात्रा के आधार पर किया जाएगा, जिससे कार्य की निगरानी और जवाबदेही बेहतर होगी।

सत्या शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के स्वच्छ एवं हरित दिल्ली के संकल्प के अनुरूप एमसीडी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इन पांचों परियोजनाओं के शुरू होने के बाद प्रतिदिन लगभग 5900 टन कचरे और गाद का वैज्ञानिक प्रसंस्करण संभव होगा। इससे लैंडफिल स्थलों पर दबाव घटेगा, पर्यावरणीय जोखिम कम होंगे और राजधानी को कूड़े के नए पहाड़ों से बचाने में बड़ी मदद मिलेगी।

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