June 11, 2026

नेपाल के प्रतिनिधि सभा में विपक्षी दलों का गतिरोध खत्म पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बयान पर पर विरोध आज भी जारी है।

काठमांडू, 11 जून। नेपाल के प्रतिनिधि सभा में विपक्षी दलों का गतिरोध खत्म जरूर हो गया है पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बयान पर पर विरोध आज भी जारी है। विपक्ष ने प्रधानमंत्री के सीमा विवाद पर दिए गए बयान पर गंभीर आपत्ति जताई है। शाह ने कहा था कि “नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है।” विपक्षी दलों ने इस बयान के पीछे की मंशा और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) की आधिकारिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं।

विवाद की शुरुआत 31 मई को प्रतिनिधि सभा की बैठक में प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बयान से हुई। विपक्षी सांसदों का कहना है कि दस दिन बीत जाने के बावजूद प्रधानमंत्री ने न तो अपने बयान पर कोई स्पष्टीकरण दिया है, न ही उसे वापस लिया है और न ही संसद में उपस्थित होकर माफी मांगी है।सीपीएन-यूएमएल, नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी तथा राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) सहित प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार पर नेपाल की संप्रभुता और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।

आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने के साथ हुई चर्चा के दौरान नेपाली कांग्रेस संसदीय दल के नेता भीष्मराज आङ्देम्बे ने कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी से जनता की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा, “दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने न तो अपने बयान में सुधार किया और न ही माफी मांगी। यह कोई सामान्य विषय नहीं है। यह राष्ट्रवाद और देश की गरिमा से जुड़ा मामला है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस बयान पर स्पष्टीकरण देने से बचती रही तो उसकी मंशा पर सवाल खड़े होंगे।

सीपीएन-यूएमएल के मुख्य सचेतक ऐन महर ने भी इसी तरह की चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के बयान और उसके बाद की घटनाओं ने संदेह की स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने प्रश्न किया, “नेपाल ने आखिर भारत के किस क्षेत्र पर अतिक्रमण किया है? कोई प्रधानमंत्री संसद में ऐसा बयान देकर माफी मांगने से कैसे इंकार कर सकता है?” महर ने यह भी कहा कि भारतीय मीडिया में इस बयान को व्यापक रूप से प्रकाशित किया गया, इसके बाद वरिष्ठ सरकारी नेताओं की भारत यात्रा हुई और सीमा विवादों पर प्रभावी कूटनीतिक पहल भी नहीं दिखी, जिससे विपक्ष की चिंताएं और बढ़ी हैं।

महार ने कहा कि सत्तारूढ़ दल ने अब तक इस विषय पर कोई आधिकारिक धारणा सार्वजनिक नहीं की है और विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया को भी अपर्याप्त बताया। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीयता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता ऐसे मुद्दे हैं जिन पर किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।” नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के मुख्य सचेतक युवराज दुलाल ने भी प्रधानमंत्री के बयान को खारिज करते हुए कहा कि नेपाल ने किसी भी पड़ोसी देश की भूमि पर अतिक्रमण नहीं किया है।

उन्होंने कहा, “लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी से जुड़े सीमा विवाद अब भी अनसुलझे हैं। इन मुद्दों के समाधान की दिशा में काम करने के बजाय प्रधानमंत्री यह कह रहे हैं कि नेपाल ने भारतीय भूमि पर अतिक्रमण किया है। जनता ऐसे बयान को स्वीकार नहीं करेगी।” दुलाल ने प्रधानमंत्री से नेपाली जनता से सीधे माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि राष्ट्रीय संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

आरपीपी सांसद खुशबु ओली ने भी सरकार पर भारत के प्रति अत्यधिक नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री से स्पष्ट जवाब मांगा।

उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने नेपाल की संप्रभुता की रक्षा के लिए बड़े त्याग किए हैं। यदि सरकार इस मुद्दे पर नरम पड़ गई है तो उसे खुलकर कहना चाहिए। प्रधानमंत्री का बयान अत्यंत गंभीर है और इसे मामूली विषय कहकर नहीं टाला जा सकता।”

विपक्षी नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री अब तक संसद में उपस्थित होकर इस विवाद पर जवाब देने क्यों नहीं आए। उनका कहना है कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं उपस्थित नहीं हो सकते, तो कम से कम उनका लिखित स्पष्टीकरण किसी मंत्री के माध्यम से सदन में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

नेपाली कांग्रेस संसदीय दल के नेता भीष्म आङ्देम्बे ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री का लिखित स्पष्टीकरण विदेश मंत्री या मंत्रिपरिषद के किसी अन्य सदस्य द्वारा सदन में पढ़कर सुनाया जाता है, तो विपक्षी दल उसे स्वीकार करने को तैयार हैं।

Related Post

Advertisement








Tranding News

Get In Touch

hindnesri24news@gmail.com

Follow Us

© Hind Kesari24. All Rights Reserved.