June 15, 2026

यूक्रेन को दिए गए हथियारों के लिए मुआवजे की मांग करेगा स्लोवाकिया : रॉबर्ट फिको

ब्रातिस्लावा, 15 जून । यूरोपीय देश स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको ने घोषणा की है कि उनका देश यूक्रेन को दिए गए सैन्य उपकरणों और हथियारों के बदले यूरोपीय संघ (ईयू) से मुआवज़े की मांग करेगा। फिको ने रविवार को फेसबुक पर एक वीडियो संदेश में आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने यूक्रेन सहायता समझौते के बारे में स्लोवाकियाई जनता को गुमराह किया था।

रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रूस टुडे के अनुसार प्रधानमंत्री फिको ने कहा कि 2022 एवं 2023 के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री एडुआर्ड हेगरकी सरकार ने यूक्रेन को बड़ी मात्रा में सैन्य सहायता भेजी, जिससे स्लोवाकिया की सुरक्षा क्षमता प्रभावित हुई। उनके अनुसार देश को लगभग पूरी तरह असुरक्षित छोड़ दिया गया था।

यूक्रेन संघर्ष के तेज होने के बाद स्लोवाकिया ने सोवियत-युग के कई टैंक, पैदल सेना के लड़ाकू वाहन, मिकोयान मिग-29 लड़ाकू विमान और एस-300 वायु रक्षा प्रणाली कीव को उपलब्ध कराई थी। कील इंस्टीट्यूट फॉर द वर्ल्ड इकॉनमी के अनुसार स्लोवाकिया ने 2022 और 2023 के बीच यूक्रेन को लगभग 700 मिलियन यूरो (₹7,687 कराेड़ रुपये) मूल्य के सैन्य उपकरण सौंपे थे।

प्रधानमंत्री फिको ने कहा कि आगामी ईयू शिखर सम्मेलन में वह इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे और यूक्रेन को दिए गए सैन्य उपकरणों के बदले वित्तीय या सैन्य मुआवज़े की मांग करेंगे।

पूर्व के समझौते के अनुसार स्लोवाकिया द्वारा दान किए गए हथियारों की भरपाई पश्चिमी देशों द्वारा निर्मित सैन्य उपकरणों से की जानी थी, जिनकी आपूर्ति मुख्य रूप से जर्मनी द्वारा की जानी थी। हालांकि स्लोवाकिया के रक्षा मंत्रालय ने पहले ही इस व्यवस्था को अपर्याप्त बताया था, क्योंकि जर्मनी ने केवल आधे उपकरणों की भरपाई का आश्वासन दिया था।

फिको लंबे समय से यूरोपीय संघ की रूस-यूक्रेन नीति के आलोचक रहे हैं। वह इस वर्ष मॉस्को में विक्ट्री डे समारोह में शामिल होने वाले एकमात्र ईयू नेता थे। उन्होंने यूरोप और रूस के बीच बढ़ते तनाव को न्यू आयरन कर्टेन (नई विभाजन रेखा)का खतरा बताते हुए संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया।

उन्होंने ईयू की रूस विरोधी नीतियों और प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा कि इनका असर यूरोपीय देशों की प्रतिस्पर्धात्मकता और ऊर्जा लागत पर पड़ रहा है। फिको ने दावा किया कि यूरोप को बढ़ती ऊर्जा कीमतों और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि ईयू यूक्रेन को समर्थन जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

दूसरी ओर रूस ने कहा है कि उसने कभी भी वार्ता से इनकार नहीं किया है। मॉस्को का आरोप है कि पश्चिमी देशों की नीतियां संघर्ष को लंबा खींच रही हैं और शांति प्रयासों को कमजोर कर रही हैं।

Advertisement








Tranding News

Get In Touch

hindnesri24news@gmail.com

Follow Us

© Hind Kesari24. All Rights Reserved.