July 01, 2026

दिल्ली की धरोहरों के संरक्षण के लिए दो नई योजनाओं का ऐलान |

नई दिल्ली 01 जुलाई : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, विकास और संवर्धन के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की है। दोनों योजनाएं कैबिनेट ने मंजूर कर दी है। इन योजनाओं के माध्यम से दिल्ली सरकार पहली बार सरकारी, निजी और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी से दिल्ली के स्थानीय महत्व के ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण और विकास का व्यापक अभियान शुरू करेगी।  दिल्ली सरकार 'हमारे स्मारक, हमारा गौरव' योजना के अंतर्गत ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ और ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ शुरू कर रही है, ताकि अधिक से अधिक संस्थाएं और नागरिक इस अभियान का हिस्सा बन सकें।

मुख्यमंत्री ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति जारी कर बताया कि दिल्ली सरकार का पुरातत्व विभाग ‘दिल्ली प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम 2004 के अंतर्गत दिल्ली के स्थानीय महत्व वाले उन ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण, रखरखाव और विकास का दायित्व निभाता है, जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते। इन स्मारकों को बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना, उनके आसपास आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना, उनका व्यवस्थित रखरखाव सुनिश्चित करना और उन्हें पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक एवं सुविधाजनक बनाना दिल्ली सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ के अंतर्गत सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), निजी कंपनियां, पंजीकृत एनजीओ, ट्रस्ट, संस्थाएं और इच्छुक नागरिक स्वैच्छिक योगदान के माध्यम से दिल्ली सरकार के ऐतिहासिक स्मारकों को गोद ले सकेंगे। ऐसे सहयोगी ‘स्मारक मित्र’ कहलाएंगे। वर्तमान में दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के संरक्षण में 75 ऐतिहासिक स्मारक हैं। इस योजना के तहत ‘स्मारक मित्र’ संबंधित स्मारक पर साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, लाइट एंड साउंड जैसी पर्यटक सुविधाओं के विकास, संचालन और रख-रखाव का पूरा खर्च स्वयं वहन करेंगे। इसके तहत प्रत्येक गोद लिए गए स्मारक पर दिल्ली सरकार को औसतन लगभग 4.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष की बचत होगी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अगर स्मारक मित्र किसी स्वीकृत कार्यक्रम या आयोजन से कोई आय अर्जित करते हैं तो उस राशि का उपयोग केवल संबंधित स्मारक के रखरखाव और विकास पर ही किया जाएगा। उस आय को निजी लाभ के रूप में अपने पास रखने की अनुमति नहीं होगी। स्मारक अभिग्रहण की अवधि पांच वर्ष होगी। इसके लिए दिल्ली सरकार, संबंधित भूमि स्वामी एजेंसी और स्मारक मित्र के बीच त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होगी तथा नियमित निगरानी, समय-समय पर समीक्षा और हितधारकों एवं पर्यटकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर योजना का मूल्यांकन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इच्छुक संस्थाओं और व्यक्तियों को ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (ईओआई) प्रस्तुत करना होगा और प्रत्येक स्मारक के लिए एक विजन डॉक्यूमेंट देना होगा, जिसमें प्रस्तावित विकास कार्यों, आवश्यक सुविधाओं और रखरखाव में दिए जाने वाले योगदान का विस्तृत विवरण होगा।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘दिल्ली मुख्यमंत्री स्मारक अभिग्रहण योजना’ और ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ का उद्देश्य अलग-अलग है। स्मारक अभिग्रहण योजना के तहत ‘स्मारक मित्र’ अपने संसाधनों से स्मारकों पर साफ-सफाई, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, लाइट एंड साउंड और अन्य पर्यटक सुविधाओं के विकास और रखरखाव का कार्य करेंगे। वहीं ‘दिल्ली मुख्यमंत्री विरासत नवोत्थान योजना’ के तहत सरकार पात्र एवं विशेषज्ञ संस्थाओं को स्मारकों के मूल संरक्षण, जीर्णोद्धार और अन्य तकनीकी संरक्षण कार्यों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत पात्र संस्थाओं को अधिकतम 2 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जा सकेगा। इस योजना का लाभ राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर पंजीकृत स्वैच्छिक संगठन, ट्रस्ट, फाउंडेशन, शैक्षणिक संस्थान, विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय और केंद्र एवं राज्य सरकारों के स्वायत्त संस्थान प्राप्त कर सकेंगे। स्वैच्छिक संगठनों, ट्रस्ट, फाउंडेशन और शैक्षणिक संस्थानों के लिए भारत सरकार के दर्पण पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में दिल्ली सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन 75 स्मारकों में से 21 स्मारकों का मूल संरक्षण दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम (डीटीटीडीसी) द्वारा कराया जा रहा है। नई योजना के माध्यम से इस कार्य में पात्र एवं विशेषज्ञ संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पात्र संस्थाओं को निर्धारित आवेदन पत्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन पुरातत्व विभाग की वेबसाइट और समाचार पत्रों में प्रकाशित आमंत्रण के आधार पर किए जाएंगे। विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय और सरकारी स्वायत्त संस्थान अपने रजिस्ट्रार या विभागाध्यक्ष के माध्यम से सीधे आवेदन कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन दोनों योजनाओं से कुशल, अर्धकुशल और पेशेवर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, पारंपरिक शिल्पों को बढ़ावा मिलेगा, युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ेगी और स्थानीय समुदायों की आजीविका को भी मजबूती मिलेगी। दिल्ली सरकार का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करना नहीं, बल्कि उन्हें जनभागीदारी के माध्यम से जीवंत सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना है।

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