July 03, 2026

नए कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए।

तेहरान, 03 जुलाई । ईरान में इस साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में मारे गए देश के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में शुरू हो गई हैं। खामेनेई के ताबूत के पास एक खास लाल झंडा रखा गया है। दिवंगत नेता के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम शुरू होने से पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के नए कमांडर ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी पहली बार सार्वजनिक रूप से नजर आए।

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका से युद्ध के बाद आईआरजीसी के कमांडर अहमद वाहिदी पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए। उन्हें रात को अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार जुलूस (जो 4 जुलाई से शुरू होगा) से पहले उनके ताबूत के पास देखा गया। तेहरान में हुसैनी इमाम खुमैनी के पास विदाई समारोह के लिए अयातुल्ला अली खामेनेई का पार्थिव शरीर पहुंच गया है। हुसैनी इमाम खुमैनी तेहरान में स्थित एक प्रमुख धार्मिक और राजनीतिक सभा स्थल है। अली खामेनेई ने तीन दशकों से ज्यादा समय तक देश का नेतृत्व किया है।

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नए प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी ने पूर्ववर्ती मोहम्मद पाकपौर की जगह ली है। पाकपौर ईरान पर शुरुआती अमेरिकी-इजराइली हमलों में मारे गए थे। वाहिदी ने गुरुवार रात पूर्व सर्वोच्च नेता खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

1970 के दशक के आखिर में आईआरजीसी की शुरुआत से ही उससे जुड़े रहे वाहिदी 1980 के दशक में ऊंचे पदों पर पहुंचे और खुफिया व सैन्य विभागों में अहम भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने 1988 से 1997 तक कुद्स फोर्स का नेतृत्व किया। बाद में वाहिदी ने यह भूमिका ईरान के मशहूर कमांडर कासिम सुलेमानी को सौंप दी। सुलेमानी 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर हुए हवाई हमले में मारे गए।

दिसंबर 2025 में सर्वोच्च नेता खामेनेई ने वाहिदी को आईआरजीसी का उप प्रमुख नियुक्त किया। वाहिदी ने वरिष्ठ राजनीतिक भूमिकाएं भी निभाई हैं। वह पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद के कार्यकाल में रक्षामंत्री और फिर दिवंगत राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी के कार्यकाल में गृहमंत्री रहे।

दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के ताबूत पर इमाम रजा दरगाह का खास लाल झंडा रखा गया है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में मध्य पूर्व और इस्लामी राजनीति के एसोसिएट प्रोफेसर नादेर हाशमी का मानना है कि लाल झंडा हुसैन इब्न अली के बलिदान का प्रतीक है। हुसैन इब्न अली पैगंबर मोहम्मद के पोते हैं।

वह कर्बला की लड़ाई में मारे गए थे। हाशमी ने कहा, "कर्बला की लड़ाई में उनकी मौत और शहादत शिया मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण नैतिक संदर्भ बिंदु है। इसीलिए इस्लामिक गणराज्य ईरान अपने सर्वोच्च नेता की अमेरिकी और इजराइली हमले में हुई मौत की तुलना उनसे करने की कोशिश कर रहा है।"

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