August 11, 2026

सावन की अमावस्या पर लगेगा साल का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण, यूरोप में दिन में छा जाएगा अंधेरा

भोपाल, 11 अगस्त। खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए बुधवार, 12 अगस्त का दिन बेहद खास होने जा रहा है, क्योंकि इस दिन अंतरिक्ष में एक दुर्लभ और ऐतिहासिक खगोलीय घटना होने जा रही है। बुधवार को भारत में जब लोग सावन की अमावस्या मना रहे होंगे, तब साल का सबसे बड़ा पूर्ण सूर्य ग्रहण लगेगा, जिसके कारण दुनिया के कई हिस्सों में दिन के समय ही पूरी तरह से अंधेरा छा जाएगा।

मप्र की नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने मंगलवार को इस खगोलीय घटना को लेकर वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि यह घटना विशेष रूप से यूरोप महाद्वीप के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि वहां पूरे 27 साल बाद कोई पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देने जा रहा है। इससे पहले यूरोप ने साल 1999 में ऐसा नजारा देखा था।

सारिका घारू ने बताया कि भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और मध्य रात्रि को पार करते हुए मध्यरात्रि के बाद (13 अगस्त की) 01:27 बजे समाप्त होगा। चूंकि ग्रहण की पूरी अवधि भारत में रात के समय होगी, जब सूर्य पहले से ही क्षितिज के नीचे छिपा होगा, इसलिए यह सूर्य ग्रहण भारत में कहीं भी दिखाई नहीं देगा।

उन्होंने बताया कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा की विशाल छाया पृथ्वी के एक बड़े हिस्से को कवर करेगी। पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य मार्ग उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और पुर्तगाल से होकर गुजरेगा, जहाँ लोग दिन में रात होने का अनुभव करेंगे। इसके अलावा, पूरे यूरोप, कनाडा और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में आंशिक सूर्य ग्रहण देखा जा सकेगा।

सारिका ने लोगों से अपील की है कि वे ग्रहण से जुड़े अंधविश्वासों से दूर रहें और इसे केवल एक सुंदर प्राकृतिक और खगोलीय घटना के रूप में देखें। इस ग्रहण को विश्व की लगभग 12 प्रतिशत जनसंख्या प्रत्यक्ष देख सकेगी। वहीं भारत के खगोल प्रेमी इस अद्भुत दृश्य को नासा या अन्य वैज्ञानिक संस्थाओं के ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम के माध्यम से देख सकते हैं।

उन्होंने बताया कि इस ग्रहण के 15 दिन के बाद 28 अगस्त को आंशिक चंद्रग्रहण होगा, लेकिन इसे भी भारत मे नहीं देखा जा सकेगा। सारिका ने कहा कि अगर भारत मे आप इसे अपने शहर मे देखना चाहते हैं तो 2 अगस्त 2027 तक का इंतजार करना होगा, जब यह आंशिक सूर्यग्रहण के रूप में दिख सकेगा।

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