August 14, 2026

स्क्रीन टाइम से बढ़ रही न्यूरोलॉजिकल परेशानी माइग्रेन से बचाव के लिए प्रिवेंटिव थेरेपी पर जोर

स्मार्टफोन और डिजिटल स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका असर स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे रहा है। लंबे समय तक मोबाइल देखने से आंखों पर तनाव, सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। न्यूरोलॉजी विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार सिरदर्द को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और सही इलाज जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली रोशनी, लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना, नींद की कमी और मानसिक तनाव सिरदर्द को बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हैं। कई लोगों में बार-बार होने वाला सिरदर्द धीरे-धीरे माइग्रेन का रूप ले सकता है।

स्क्रीन टाइम और सिरदर्द का संबंध लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन देखने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। इससे आंखों में थकान, धुंधला दिखाई देना और सिर के आसपास दर्द महसूस हो सकता है। खासकर रात में ज्यादा देर तक मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद प्रभावित होती है, जिसका असर मस्तिष्क पर पड़ता है। माइग्रेन के लक्षणों को पहचानना जरूरी माइग्रेन सामान्य सिरदर्द से अलग होता है। इसमें अक्सर सिर के एक हिस्से में तेज दर्द, रोशनी और आवाज से परेशानी, मतली या उल्टी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों में दर्द कई घंटों या दिनों तक बना रह सकता है।
प्रिवेंटिव थेरेपी से मिल सकती है राहत डॉक्टरों के अनुसार, जिन लोगों को बार-बार माइग्रेन की समस्या होती है, उनके लिए प्रिवेंटिव थेरेपी मददगार साबित हो सकती है। इसका उद्देश्य दर्द की आवृत्ति और तीव्रता को कम करना होता है। इसमें डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं, जीवनशैली में बदलाव और तनाव प्रबंधन की सलाह दे सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के लगातार दर्द की दवा लेना नुकसानदायक हो सकता है। मोबाइल इस्तेमाल करते समय रखें ध्यान
हर 20 से 30 मिनट बाद स्क्रीन से कुछ समय का ब्रेक लें। मोबाइल को आंखों से उचित दूरी पर रखें। रात में सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें। पर्याप्त नींद लें और पानी पीते रहें। सिरदर्द बार-बार होने पर विशेषज्ञ से सलाह लें। कब डॉक्टर से संपर्क करें? अगर सिरदर्द लगातार बना रहता है, अचानक बहुत तेज दर्द शुरू हो, नजर धुंधली हो, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस हो या बोलने में परेशानी आए तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाना संभव नहीं है, लेकिन सही आदतों और सावधानियों से मोबाइल के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।



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