September 05, 2026

केंद्र सरकार की ECLGS 5.0 ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार की Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) 5.0 ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। योजना के तहत अब तक 6.74 लाख से अधिक गारंटी जारी की जा चुकी हैं, जिनसे ₹2.5 लाख करोड़ से ज्यादा के ऋण को गारंटी कवर मिला है। यह आंकड़ा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक अनिश्चितताओं और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियों के बीच कारोबारों, खासकर MSME सेक्टर, को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत महसूस हो रही है।

ECLGS 5.0 को सरकार ने आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित कारोबारों को अतिरिक्त ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आगे बढ़ाया है। इस व्यवस्था में पात्र उधारकर्ताओं को बैंक और अन्य सदस्य ऋणदाता संस्थान कर्ज उपलब्ध कराते हैं, जबकि निर्धारित शर्तों के तहत सरकार समर्थित गारंटी व्यवस्था ऋणदाताओं के जोखिम को कम करती है। कुछ महीनों में तेजी से बढ़ा दायरा योजना के विस्तार की रफ्तार का अंदाजा पुराने आंकड़ों से लगाया जा सकता है। जुलाई 2026 में उपलब्ध वित्त मंत्रालय से जुड़े आंकड़ों के अनुसार ECLGS 5.0 के तहत 1.40 लाख से अधिक गारंटी जारी हो चुकी थीं, जिनका मूल्य ₹1.55 लाख करोड़ से अधिक था। उस समय लाभार्थियों में MSME की हिस्सेदारी करीब 98 प्रतिशत बताई गई थी।

अब 6.74 लाख गारंटी और ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक के ऋण का स्तर पार होना योजना के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल को दिखाता है। MSME को वर्किंग कैपिटल में मदद ECLGS का मुख्य उद्देश्य पात्र कारोबारों के लिए बैंक ऋण तक पहुंच आसान करना है। वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव, कच्चे माल की कीमत, आयात-निर्यात से जुड़ी बाधाओं और सप्लाई चेन में देरी जैसी परिस्थितियां छोटे कारोबारों के वर्किंग कैपिटल साइकल को प्रभावित कर सकती हैं।

Bank of India के प्रबंधन ने भी हाल की अपनी आय संबंधी चर्चा में बताया था कि केमिकल, सिरेमिक और आयात-निर्यात से जुड़े कुछ उद्योगों में वैश्विक परिस्थितियों का असर देखा जा रहा है। बैंक ने उस समय ECLGS के तहत करीब ₹6,000 करोड़ के ऋण मंजूर करने और लगभग ₹4,600 करोड़ के वितरण की जानकारी दी थी। बैंकों के लिए भी कम होता है जोखिम ECLGS की खासियत यह है कि सरकार समर्थित गारंटी के कारण पात्र ऋण देने में बैंकों और वित्तीय संस्थानों का जोखिम कम होता है। इससे संकट या अस्थायी नकदी की कमी से जूझ रहे पात्र कारोबारों तक ऋण प्रवाह बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

यह योजना सीधे नकद सहायता देने के बजाय क्रेडिट गारंटी मॉडल पर काम करती है। यानी कारोबारी को ऋण बैंक या पात्र वित्तीय संस्था से ही मिलता है और उसे निर्धारित नियमों के अनुसार कर्ज चुकाना होता है। बड़े बैंक भी कर रहे योजना का इस्तेमाल देश के प्रमुख बैंक भी ECLGS 5.0 के तहत बड़े पैमाने पर ऋण देने की तैयारी और मंजूरी कर चुके हैं। भारतीय स्टेट बैंक ने मई में अनुमान जताया था कि वह इस योजना के तहत करीब ₹80,000 करोड़ तक का ऋण दे सकता है। Punjab National Bank से संबंधित जुलाई के आंकड़ों में भी ECLGS के लिए करीब ₹40,000 करोड़ के पात्र ऋण पोर्टफोलियो का उल्लेख था। इसमें लगभग ₹15,800 करोड़ की मंजूरी और ₹12,340 करोड़ का वितरण दर्ज किया गया था। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि सरकारी गारंटी वाली इस क्रेडिट व्यवस्था में सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े बैंकों की अहम भूमिका बनी हुई है। कारोबारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ECLGS 5.0? किसी छोटे या मध्यम कारोबार के सामने जब ऑर्डर मौजूद हों लेकिन कच्चा माल खरीदने, वेतन देने या अन्य परिचालन खर्च पूरा करने के लिए तत्काल नकदी की कमी हो, तो अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल उसकी गतिविधियां जारी रखने में मदद कर सकता है। ECLGS 5.0 इसी तरह के पात्र कारोबारों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था के जरिए अतिरिक्त वित्तीय सहारा देने का माध्यम है। हालांकि गारंटी का अर्थ कर्ज माफी नहीं है और उधारकर्ता पर ऋण चुकाने की जिम्मेदारी बनी रहती है। 6.74 लाख से ज्यादा गारंटी और ₹2.5 लाख करोड़ से अधिक के ऋण का आंकड़ा ECLGS 5.0 के बढ़ते दायरे को दिखाता है। आने वाले समय में इसका असर MSME की नकदी स्थिति, बैंक ऋण वृद्धि और वैश्विक व्यवधानों से प्रभावित उद्योगों की वित्तीय स्थिति पर नजर रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेगा।

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