September 08, 2026

स्टॉक मार्केट में फ्लाई हाई मेरिटाइम ट्रैवल्स की जबरदस्त गिरावट के साथ एंट्री, डिस्काउंट लिस्टिंग के बाद लगा लोअर सर्किट

नई दिल्ली, 08 सितंबर। शिपिंग कंपनियों को क्रू मैनेजमेंट सर्विस देने वाली मेरिटाइम ट्रैवल कंपनी फ्लाई हाई मेरिटाइम ट्रैवल्स लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट ने जबरदस्त गिरावट के साथ एंट्री कर अपने आईपीओ निवेशकों को करारा झटका दे दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 102 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई के एसएमई प्लेटफॉर्म पर इसकी लिस्टिंग 20 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ 81.60 रुपये के स्तर पर हुई।

कमजोर लिस्टिंग के बाद बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण थोड़ी देर में ही ये शेयर लुढ़क कर 77.55 रुपये के लोअर सर्किट लेवल पर पहुंच गए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में ही कंपनी के आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 24.45 रुपये यानी 23.97 प्रतिशत का नुकसान हो गया। इस आईपीओ में एक लॉट 1,200 शेयर का था। इस तरह आईपीओ निवेशकों को आज लोअर सर्किट लग जाने के कारण प्रति लॉट 29,340 रुपये की चपत लग गई।

कंपनी का 52.63 करोड़ रुपये का आईपीओ एक से तीन सितंबर के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से एवरेज रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 2.12 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में सिर्फ 58 प्रतिशत सब्सक्रिप्शन आया था। जबकि रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 3.66 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ के तहत 5 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 51.60 लाख शेयर जारी हुए हैं। इनमें लगभग 43 करोड़ रुपये के 41,60,400 नए शेयर जारी किए गए हैं। इसके अलावा लगभग 10 करोड़ रुपये के 9,99,600 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी बिजनेस और मार्केटिंग एक्टिविटीज को तेज करने, पुराने कर्ज के बोझ को हल्का करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, आईपीओ से जुड़े खर्चों की भरपाई करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

फ्लाई हाई मेरिटाइम ट्रैवल्स लिमिटेड की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 1.82 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 3.44 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को 8.43 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 45.41 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 45.75 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी को 62.21 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।

इस अवधि में कंपनी पर लदा कर्ज का बोझ भी लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पर 4.84 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 10.03 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ उछल कर 12.97 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया था।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 6.09 करोड़ रुपये के स्तर पर था। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का नेटवर्थ बढ़ कर 9.53 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में ये 17.96 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

कंपनी के रिजर्व और सरप्लस की बात करें तो इस अवधि में कंपनी को इस मोर्चे पर भी लगातार सफलता मिली। वित्त वर्ष 2023-24 में ये 6.08 करोड़ रुपये के स्तर पर था। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस बढ़ कर 9.52 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस उछल कर 12.95 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 2.68 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 5.27 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का ईबीआईटीडीए उछल कर 12.49 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

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