September 27, 2026

रजिस्ट्री के साथ ही हुआ नामांतरण, दफ्तरों के चक्कर से मिली मुक्ति

कोरबा । कोरबा....जमीन या संपत्ति की खरीदी के बाद उसका नामांतरण आम नागरिकों के लिए लंबे समय से एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया रही है। नामांतरण के लिए पटवारी कार्यालय के चक्कर, कागजी प्रक्रिया और इंतजार के कारण लोगों को समय और श्रम दोनों खर्च करने पड़ते थे। लेकिन डिजिटल व्यवस्था की दिशा में उठाए गए कदमों से अब इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आया है। छत्तीसगढ़ में शुरू की गई ‘सेवा संकल्प स्वतः नामांतरण योजना’ के तहत जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाती है। इसके साथ ही नागरिकों को डिजिटल बी-वन एवं ई-बी-वन जैसे दस्तावेज आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं।

मोहित बत्रा के लिए आसान हुआ नामांतरण

गीता वैली निवासी श्री मोहित बत्रा ने जब प्लॉट खरीदा, तो उनके मन में भी यही चिंता थी कि नामांतरण के लिए कहीं लंबे समय तक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन स्वतः नामांतरण योजना ने उनकी यह चिंता दूर कर दी।

श्री बत्रा बताते हैं कि उनका नामांतरण बेहद आसानी से हो गया और उन्हें डिजिटल बी-वन सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज भी बिना परेशानी के प्राप्त हो गए। उनके अनुसार, इस नई व्यवस्था ने नामांतरण की प्रक्रिया को पहले की अपेक्षा काफी सरल और सुविधाजनक बना दिया है।

डिजिटल व्यवस्था से सुशासन को मिली गति

सेवा संकल्प स्वतः नामांतरण योजना के माध्यम से राजस्व सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया प्रारंभ होने से नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयीन प्रक्रियाओं से राहत मिलती है और समय की बचत होती है।

मोहित बत्रा का अनुभव इस बदलाव को सहज रूप से सामने रखता है-जहां पहले नामांतरण को लेकर चिंता थी, वहीं अब डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से यह प्रक्रिया उनके लिए सरलता से पूरी हुई।

सेवा संकल्प स्वतः नामांतरण योजना ने जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया को नागरिकों के लिए अधिक सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत की है।

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