September 30, 2026

जिमीकंद तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका इसे ठीक से साफ और पकाना

अरबी और जिमीकंद ऐसी सब्जियां हैं जिनका स्वाद बहुत लोगों को पसंद आता है, लेकिन इन्हें खाने के बाद कई बार गले, जीभ या मुंह में खुजली और चुभन जैसी परेशानी होने लगती है। यही वजह है कि कुछ लोग स्वाद पसंद होने के बावजूद अरबी और जिमीकंद खाने से बचते हैं। हालांकि इन्हें सही तरीके से साफ करके और अच्छी तरह पकाया जाए तो इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सेलिब्रिटी शेफ रणवीर बरार की अरबी और जिमीकंद की रेसिपी में भी इन्हें सीधे पकाने के बजाय पहले उबालने, तलने और खटाई के साथ तैयार करने जैसे तरीके अपनाए गए हैं।

अरबी और जिमीकंद में प्राकृतिक रूप से कैल्शियम ऑक्सालेट के बेहद महीन क्रिस्टल पाए जा सकते हैं। ये मुंह और गले की नाजुक सतह के संपर्क में आने पर चुभन, जलन या खुजली पैदा कर सकते हैं। कुछ लोगों में इसकी वजह से परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है। वैज्ञानिक अध्ययनों में भी याम जैसी कंद वाली सब्जियों में मौजूद कैल्शियम ऑक्सालेट क्रिस्टल को गले और त्वचा में होने वाली जलन से जोड़ा गया है।

जिमीकंद तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका इसे ठीक से साफ और पकाना है। रणवीर बरार की जिमीकंद के अचार वाली रेसिपी में जिमीकंद को पहले धोकर छीलने और लगभग दो इंच के टुकड़ों में काटने का तरीका बताया गया है। इसके बाद टुकड़ों को दोबारा अच्छी तरह धोया जाता है। खास बात यह है कि जिमीकंद को पानी के साथ इमली डालकर प्रेशर कुकर में पकाया जाता है। रेसिपी में इसे तेज आंच पर लगभग 10 से 15 मिनट या करीब तीन सीटी तक पकाने का तरीका दिया गया है। जिमीकंद को इतना नरम होना चाहिए कि चाकू आसानी से उसके अंदर चला जाए। अगर टुकड़े सख्त रहें तो उन्हें और पकाने की सलाह दी गई है।

इस प्रक्रिया में इमली काफी अहम है। रणवीर बरार की रेसिपी में भी स्पष्ट किया गया है कि जिमीकंद गले में परेशानी पैदा कर सकता है और इसलिए इसे इमली के साथ ट्रीट किया जाता है। इसके बाद जिमीकंद का पानी निकालकर आगे की रेसिपी तैयार की जाती है। इससे साफ है कि जिमीकंद को जल्दबाजी में आधा पकाकर खाने के बजाय अच्छी तरह पकाना बेहतर तरीका है। अगर जिमीकंद की सब्जी बनानी हो तो रणवीर बरार की एक अन्य रेसिपी में इसके टुकड़ों को सरसों के तेल में मध्यम आंच पर तलने का तरीका बताया गया है। इसके बाद काली मिर्च, इलायची, लौंग, जीरा, अदरक, हरी मिर्च और दूसरे मसालों का तड़का तैयार किया जाता है। इसमें दही मिलाकर तला हुआ जिमीकंद डाला जाता है और सब्जी को ढककर करीब 5 से 10 मिनट तक पकाया जाता है। आखिर में नींबू का रस भी मिलाया जाता है। इस तरह जिमीकंद को कई चरणों में अच्छी तरह पकने का समय मिलता है।

अरबी के मामले में भी सीधे कच्ची अरबी काटकर तुरंत सब्जी बनाने के बजाय पहले उसे उबालना उपयोगी तरीका है। रणवीर बरार की अरबी टुक रेसिपी में पहले से उबली और छीली हुई अरबी का इस्तेमाल किया गया है। उबली अरबी को हल्का दबाकर तेल में पहले पकाया जाता है और फिर तेज आंच पर दोबारा तलकर सुनहरा किया जाता है। इसके बाद लाल मिर्च, हल्दी, धनिया, जीरा, नमक और आमचूर से तैयार मसाला अरबी में मिलाया जाता है। यानी इसमें अरबी को अच्छी तरह पकाने के साथ खटास भी शामिल की जाती है।

अगर तली हुई अरबी पसंद नहीं है तो इसे उबालने के बाद दही वाली ग्रेवी में भी पकाया जा सकता है। रणवीर बरार की दही वाली अरबी की रेसिपी में उबली अरबी को पहले हल्का सुनहरा करने और फिर अच्छी तरह पकी हुई दही की ग्रेवी में मिलाने का तरीका है। इससे अरबी कच्ची नहीं रहती और मसालों का स्वाद भी अच्छी तरह उसमें पहुंचता है। घर पर अरबी या जिमीकंद बनाते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। सब्जी को अच्छी तरह धोएं, छीलने के बाद हाथ साफ करें और टुकड़ों को कच्चा चखने से बचें।

जिमीकंद को पर्याप्त समय तक उबालना चाहिए और जरूरत के अनुसार इमली या नींबू जैसी खटाई का इस्तेमाल किया जा सकता है। अरबी को भी पहले अच्छी तरह उबालकर फिर सब्जी में इस्तेमाल करना आसान तरीका है। अधपकी अरबी या जिमीकंद खाने से परेशानी बढ़ सकती है। अगर अरबी या जिमीकंद खाने के बाद केवल हल्की खुजली या चुभन के बजाय गले या होंठ में तेज सूजन, निगलने में परेशानी, बहुत ज्यादा लार आना या सांस लेने में दिक्कत होने लगे तो इसे सामान्य खुजली मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कैल्शियम ऑक्सालेट से होने वाली गंभीर जलन में ऐसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

इसलिए अगली बार अरबी या जिमीकंद बनाने से पहले केवल मसालों पर ध्यान देने के बजाय उसकी तैयारी पर भी पूरा ध्यान दें। उबालना, अच्छी तरह पकाना और इमली, नींबू या आमचूर जैसी खटाई का सही इस्तेमाल स्वाद को बेहतर बनाने के साथ गले में होने वाली चुभन की आशंका को कम करने में मददगार हो सकता है। रणवीर बरार की रेसिपी का मूल तरीका भी यही बताता है कि इन कंद वाली सब्जियों को जल्दबाजी में नहीं बल्कि सही तैयारी और पर्याप्त पकाने के बाद ही परोसना चाहिए।

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