October 10, 2026

छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 कानून पर तीन सप्ताह में दें जवाब

बिलासपुर 10 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में कानून की विभिन्न धाराओं को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने साफ किया कि अगली सुनवाई में अंतरिम राहत की मांग पर दोनों पक्षों को अपनी दलीलें रखने का मौका दिया जाएगा। चीफ जस्टिस कृष्णा राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने वी.एन. प्रसाद राव की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे सरकारी वकील राहुल तामस्कर ने कोर्ट को बताया कि धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती देने वाली इसी तरह की कई अन्य याचिकाएं भी हाईकोर्ट में लंबित हैं।

उन्होंने मामले में नोटिस जारी करने और सरकार का पक्ष रखने के लिए तीन हफ्ते का समय देने का अनुरोध किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उनके साथ वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज परांजपे और अन्य अधिवक्ता भी थे। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार को जवाब तैयार करने के लिए कुछ समय दिया जा सकता है, लेकिन अंतरिम राहत के आवेदन पर अलग से सुनवाई की जाए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मुख्य याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के साथ अंतरिम राहत के आवेदन पर भी अपनी आपत्ति, यदि कोई हो, प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके लिए तीन हफ्ते की समयसीमा तय की गई है। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में अंतरिम राहत के आवेदन पर दोनों पक्षों को बहस का अवसर मिलेगा। 

Related Post

Advertisement








Tranding News

Get In Touch

[email protected]

Follow Us

© Hind Kesari24. All Rights Reserved.