नवंबर महीने की शुरुआत के साथ ही आम लोगों और कारोबार से जुड़े क्षेत्रों को महंगाई का नया झटका लगा है। तेल कंपनियों ने 1 नवंबर 2026 से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर और विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरों के मुताबिक, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 10 रुपये का इजाफा किया गया है। वहीं, हवाई ईंधन के दाम 1.37 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए गए हैं। इन बढ़ोतरी का असर होटल, रेस्टोरेंट, खानपान कारोबार और विमानन कंपनियों के खर्च पर पड़ सकता है। हालांकि, घरेलू रसोई गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। नई दरें महीने की पहली तारीख से लागू हो गई हैं।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2,820 रुपये हो गई है। इससे पहले 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर का भाव 2,810 रुपये था। यह लगातार दूसरा महीना है, जब कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले 1 अक्टूबर को भी सिलेंडर के दाम में 62.50 रुपये की वृद्धि हुई थी। सितंबर में भी कीमत 9.50 रुपये बढ़ाई गई थी। हालांकि, इससे पहले जुलाई और अगस्त में लगातार दो महीनों तक कमर्शियल गैस के दाम घटाए गए थे। जुलाई में 183.50 रुपये और अगस्त में 192 रुपये की कटौती की गई थी। इस साल फरवरी से जून के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के कारण कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 1,373 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी हुई थी। जून में इसकी कीमत 3,113.50 रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी। इसके बाद कीमतों में राहत मिली, लेकिन पिछले दो महीनों से फिर बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा होने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों, कैटरिंग सेवाओं और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ सकता है। इन कारोबारों में रोजाना बड़ी मात्रा में गैस का इस्तेमाल होता है। ऐसे में सिलेंडर की कीमत बढ़ने से उनकी परिचालन लागत बढ़ सकती है। कारोबारियों के सामने चुनौती होगी कि बढ़ी हुई लागत का बोझ खुद उठाएं या खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में बदलाव करें। यदि लगातार गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर बाहर खाना खाने वाले ग्राहकों के बजट पर भी पड़ सकता है। हालांकि, कीमतों में बदलाव का अंतिम असर कारोबारियों की लागत, प्रतिस्पर्धा और स्थानीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
दूसरी ओर, विमानन क्षेत्र के लिए इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF की कीमत भी बढ़ाई गई है। इसकी दर 137.12 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 138.50 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह लगातार चौथा महीना है, जब हवाई ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले अगस्त में 5 रुपये प्रति लीटर, सितंबर में 6.28 रुपये प्रति लीटर और अक्टूबर में 16 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी काफी अधिक होती है और यह कुछ मामलों में 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में ATF महंगा होने से एयरलाइंस के खर्च पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हवाई टिकटों की कीमतें तत्काल बढ़ जाएंगी। किराये पर ईंधन लागत के अलावा यात्रियों की मांग, प्रतिस्पर्धा और कंपनियों की व्यावसायिक रणनीति का भी असर पड़ता है।
इन दोनों ईंधनों की कीमतों में बदलाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा उत्पादों के दाम और रुपये-डॉलर की विनिमय दर को प्रमुख कारण माना जा रहा है। तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और अन्य लागतों के आधार पर नई दरें तय करती हैं। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों के कारण कीमतों में अंतर भी हो सकता है। राहत की बात यह है कि घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पर बरकरार रखी गई है। पेट्रोल और डीजल के दामों में भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। कुल मिलाकर, नवंबर की शुरुआत में कमर्शियल गैस और हवाई ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी से कारोबार और विमानन क्षेत्र की लागत बढ़ने की आशंका है, जबकि घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है।
© Hind Kesari24. All Rights Reserved.