April 02, 2026

साइ पैरेंटरल्स की स्टॉक मार्केट में मामूली बढ़त के साथ शुरुआत, फायदे में आईपीओ निवेशक

नई दिल्ली, 02 अप्रैल । फार्मास्यूटिकल फॉर्मेशन तैयार करने वाली कंपनी साई पैरेंटरल्स लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में जबरदस्त गिरावट के बावजूद बढ़त के साथ एंट्री करके अपने आईपीओ निवेशकों को काफी राहत पहुंचाया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 392 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई पर इसकी लिस्टिंग 3.32 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 405 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग 2.04 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 400 रुपये के स्तर पर हुई।

लिस्टिंग के बाद लिवाली के सपोर्ट से ये ये शेयर उछल कर 414.90 रुपये के स्तर तक भी पहुंचा। हालांकि बाद में मुनाफा वसूली शुरू हो जाने के कारण इसकी चाल में थोड़ी गिरावट भी आई। सुबह 11 बजे तक का कारोबार होने के बाद कंपनी के शेयर बीएसई पर 404 रुपये के स्तर पर और एनएसई पर 403.20 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहे थे। इस तरह अभी तक के कारोबार के बाद कंपनी के आईपीओ निवेशक लगभग तीन प्रतिशत के फायदे में थे।

साई पैरेंटरल्स का 408.79 करोड़ रुपये का आईपीओ 24 से 27 मार्च के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से फीका रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 1.08 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 1.73 गुना सब्सक्राइब हुआ था। वहीं नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 2.45 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसी तरह रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन सिर्फ 012 गुना सब्सक्राइब हो सका था।

इस आईपीओ के तहत पांच रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 1,04,28,288 शेयर जारी किए गए थे। इनमें 285 करोड़ रुपये के 72,70,408 लाख नए शेयर जारी किए गए हैं। इसके अलावा 124 करोड़ रुपये के 31,57,880 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के जरिये बेचे गए हैं। आईपीओ में नए शेयरों की बिक्री के जरिये जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी अपने मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज का विस्तार और अपग्रेड करने, आरएंडडी सेंटर स्थापित करने, पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

कंपनी की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत लगातार मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी को 4.38 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 8.42 करोड़ रुपये और 2024-25 में उछल कर 14.43 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक कंपनी को 7.76 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हो चुका है।

इस दौरान कंपनी की कुल आय में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में इसे 97.03 करोड़ की कुल आय हुई, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 155.18 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 163.74 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गई। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक कंपनी 89.43 करोड़ रुपये की आय अर्जित कर चुकी है।

इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ में उतार चढ़ाव होता रहा। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत में कंपनी पर 68.55 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ था, जो वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़ कर 118.79 करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2024-25 में घट कर 93.95 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 की बात करें, तो इस दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ 76.07 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस दौरान कंपनी के नेटवर्थ में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 31.49 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 76.40 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का नेटवर्थ 95.78 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक ये 209.37 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इस अवधि में कंपनी के रिजर्व और सरप्लस में भी बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2022-23 में ये 24.34 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 61.30 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 2024-25 में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 80.36 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक ये 188.84 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2022-23 में 17.64 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2023-24 में बढ़ कर 31.70 करोड़ रुपये और 2024-25 में उछल कर 39.44 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से 30 सितंबर 2025 तक ये 16.24 करोड़ रुपये के स्तर पर था।

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