April 04, 2026

कलारबाहरा में रागी खेती का निरीक्षण, किसानों के नवाचार की सराहना

धमतरी, 04 अप्रैल । जिले में खेती के तौर-तरीकों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। पारंपरिक धान के साथ अब किसान फसलचक्र परिवर्तन अपनाते हुए दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में शनिवार काे कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने ग्राम पंचायत अरौद के कलारबाहरा पहुंचकर किसान सगनूराम नेताम के खेत में लगी रागी (मंडुआ) फसल का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने खेत में पहुंचकर रागी की फसल की स्थिति, उत्पादन क्षमता और खेती की पद्धतियों का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने किसान सगनूराम नेताम से लागत, आय और श्रम के बारे में जानकारी ली। किसान ने बताया कि वह साल में तीन फसल ले रहा है और खेत के पास डबरी बनाकर मछलीपालन भी कर रहा है, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। कलेक्टर ने किसानों और महिला कृषकों से संवाद करते हुए रागी खेती के लाभों पर चर्चा की और उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रागी जैसी मोटे अनाज की फसलें कम पानी में तैयार होती हैं, पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं और जलवायु के अनुकूल होने के कारण भविष्य की कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति अपनाने, उन्नत बीजों के उपयोग और कृषि विभाग से निरंतर संपर्क बनाए रखने की सलाह दी।

फसल विविधीकरण से मजबूत हो रही कृषि धमतरी जिले में रागी की खेती अब लगभग 1,250 हेक्टेयर क्षेत्र में फैल चुकी है, जिसमें करीब 1,180 किसान जुड़े हुए हैं। इसके अलावा रबी सीजन में चना, अरहर और मसूर जैसी दलहन फसलें 18,450 हेक्टेयर क्षेत्र में ली जा रही हैं। तिलहन फसलों में सरसों का रकबा 8,300 हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि कुल तिलहन क्षेत्र लगभग 9,600 हेक्टेयर है।

पोषण, पर्यावरण और आय—तीनों में संतुलन

रागी और अन्य मोटे अनाज किसानों के लिए बहुआयामी लाभ लेकर आ रहे हैं। ये फसलें कम लागत और कम जोखिम में बेहतर उत्पादन देती हैं, जिससे आय में स्थायित्व आता है। साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मददगार हैं।

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