हाल ही में हुई एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पता चला है कि धूप और बारिश की कमी से मिट्टी सूखती है, जिससे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस यानी दवाओं के प्रति बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सकती है। यह शोध नेचर माइक्रोबायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुई। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ती गर्मी और कम बारिश मिट्टी को और अधिक सूखा बना रही है, जिससे न केवल पर्यावरण पर असर पड़ रहा है, बल्कि पब्लिक हेल्थ के लिए खतरा भी बढ़ रहा है।
अध्ययन में US के कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं ने 116 देशों के हॉस्पिटल से इकट्ठा किए गए एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस डेटा का विश्लेषण किया। इसे उस क्षेत्र की बारिश और तापमान के आंकड़ों के साथ जोड़ा गया। नतीजों में पाया गया कि जिन इलाकों में ज्यादा सूखा था, वहां एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का स्तर भी अधिक था। वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी में नेचुरली बड़ी संख्या में माइक्रोब्स पाए जाते हैं जो एंटीबायोटिक बनाते हैं। ये बैक्टीरिया अपने बीच प्रतिस्पर्धा में एक-दूसरे से लड़ने के लिए केमिकल्स का निर्माण करते हैं। लेकिन जब धूप ज्यादा होती है और मिट्टी सूखी रहती है, तो इन एंटीबायोटिक्स का स्तर बढ़ जाता है। इससे संवेदनशील बैक्टीरिया कम हो जाते हैं, जबकि रेजिस्टेंट बैक्टीरिया जीवित रहते हैं और उनकी संख्या बढ़ती है।
अध्ययन में कैलिफ़ोर्निया की खेती की जमीन, घास के मैदान, स्विट्ज़रलैंड के जंगल और चीन के वेटलैंड्स से मिट्टी के सैंपल लिए गए। विश्लेषण से यह भी सामने आया कि धूप वाले क्षेत्रों में एंटीबायोटिक बनाने वाले जीनों की संख्या अधिक होती है। लैब में किए गए एक्सपेरिमेंट में भी यही देखा गया। जब मिट्टी में पानी की मात्रा कम हुई, तो एंटीबायोटिक का स्तर बढ़ गया और सामान्य बैक्टीरिया लगभग 99 प्रतिशत तक कम हो गए, जबकि एंटीबायोटिक-रेसिस्टेंट बैक्टीरिया पर कोई असर नहीं पड़ा।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे पता चलता है कि क्लाइमेट चेंज सीधे तौर पर पब्लिक हेल्थ पर अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये बदलाव मानव स्वास्थ्य को कितने गंभीर रूप से प्रभावित करेंगे। लेकिन मिट्टी में बढ़ती एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस भविष्य में संक्रमण और दवाओं के असर को कम करने में चुनौती पेश कर सकती है। अध्ययन से यह भी स्पष्ट हुआ कि सूरज की अधिक रोशनी और सूखी मिट्टी न सिर्फ पर्यावरण को प्रभावित कर रही है, बल्कि बैक्टीरिया के रेजिस्टेंट स्वरूप को बढ़ावा देकर एंटीबायोटिक दवाओं की क्षमता को कमजोर करने में भी योगदान दे रही है। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए मिट्टी और पानी के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाए और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर निगरानी बढ़ाई जाए।
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