May 09, 2026

एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को कंपनी के खर्चों में कटौती और गैर-ज़रूरी व्यय को तुरंत रोकने की अपील

दिल्ली 09 मई: घाटे में चल रही एयर इंडिया ने मौजूदा आर्थिक दबाव और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच अपने खर्चों पर सख्त नियंत्रण की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने शुक्रवार को कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कंपनी के खर्चों में कटौती और गैर-ज़रूरी व्यय को तुरंत रोकने की अपील की। कैंपबेल विल्सन ने स्पष्ट किया कि यह समय कंपनी के लिए “मुश्किल दौर” है और ऐसे में हर स्तर पर वित्तीय अनुशासन बेहद जरूरी है। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर भी अनावश्यक खर्चों से बचा जाए ताकि कंपनी की आर्थिक स्थिति को संभाला जा सके।

इस टाउनहॉल बैठक में एयर इंडिया के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर संजय शर्मा और चीफ ह्यूमन रिसोर्स ऑफिसर रवींद्र कुमार जीपी भी मौजूद थे। बैठक के दौरान कंपनी की मौजूदा वित्तीय स्थिति, भविष्य की योजनाओं और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। सूत्रों के मुताबिक, मैनेजमेंट ने कर्मचारियों को यह भी भरोसा दिलाया कि फिलहाल किसी तरह की छंटनी की योजना नहीं है, जिससे कर्मचारियों में राहत की भावना देखी गई। कंपनी ने यह संकेत दिया है कि वह मौजूदा कर्मचारियों को बनाए रखते हुए लागत नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करेगी।

बैठक में यह भी बताया गया कि एयर इंडिया पिछले वित्तीय वर्ष के लिए वेरिएबल पे के साथ आगे बढ़ेगी और पहले से तय प्रमोशन योजनाओं को जारी रखा जाएगा। हालांकि, मौजूदा आर्थिक अनिश्चितता को देखते हुए सालाना वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) को कम से कम एक तिमाही के लिए टालने का निर्णय लिया गया है। कंपनी प्रबंधन का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं, ईंधन कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर विमानन क्षेत्र पर पड़ रहा है। ऐसे में वित्तीय स्थिरता बनाए रखना प्राथमिकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, विमानन उद्योग पहले से ही लागत दबाव और प्रतिस्पर्धा के कारण चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है, और ऐसे में एयर इंडिया जैसे बड़े ऑपरेटरों के लिए खर्च नियंत्रण बेहद जरूरी हो गया है। कर्मचारियों को दिए गए संदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि कंपनी लंबी अवधि में सुधार और स्थिरता की दिशा में काम कर रही है, और वर्तमान कदम इसी रणनीति का हिस्सा हैं। कुल मिलाकर एयर इंडिया ने फिलहाल छंटनी से इनकार करते हुए खर्चों में कटौती और वित्तीय अनुशासन पर जोर दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी मौजूदा आर्थिक दबाव के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

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