दिल्ली 09 मई: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (प्रॉफिट बुकिंग) किए जाने से शुक्रवार को घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, दिल्ली में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिली, जबकि चांदी भी कमजोर होकर कारोबार करती नजर आई। रिपोर्ट के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 100 रुपये की गिरावट के साथ 1,55,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले यह सोना 1,56,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स सहित) के स्तर पर बंद हुआ था। बाजार में यह गिरावट लगातार चार दिनों की तेजी के बाद आई है, जिससे निवेशकों में मुनाफा वसूली का रुझान देखा गया।
इसी तरह, 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना भी मामूली गिरावट के साथ नीचे आया है। गुरुवार को यह 1,55,200 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जबकि अब यह घटकर 1,55,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बावजूद घरेलू बाजार में अल्पकालिक दबाव देखा जा रहा है। चांदी की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, चांदी 2,61,500 रुपये प्रति किलोग्राम के पिछले बंद स्तर से घटकर 2,61,300 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। इससे पहले गुरुवार को चांदी की कीमतों में लगभग 7,000 रुपये प्रति किलोग्राम की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि सोने और चांदी दोनों में हालिया तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा सुरक्षित करने के लिए बिक्री शुरू कर दी, जिसके कारण कीमतों में गिरावट आई। इसके साथ ही वेस्ट एशिया में जारी तनाव ने बाजार में अस्थिरता बनाए रखी है, जिससे कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूत करता है, लेकिन जब कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच जाती हैं, तो निवेशक मुनाफा बुक करने लगते हैं, जिससे अस्थायी गिरावट आती है।
घरेलू बाजार में फिलहाल मांग स्थिर बनी हुई है, लेकिन कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते खरीदार और निवेशक दोनों ही सतर्क नजर आ रहे हैं। शादी और त्योहारी सीजन को देखते हुए आने वाले दिनों में मांग में बदलाव संभव माना जा रहा है। कुल मिलाकर, सोने और चांदी के बाजार में यह गिरावट अल्पकालिक मुनाफावसूली और वैश्विक तनाव के मिश्रित प्रभाव का परिणाम मानी जा रही है, जबकि आगे की दिशा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और डॉलर की स्थिति पर निर्भर करेगी।
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