May 11, 2026

अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति ने पुष्टि की कि अब पैरा आर्मरेसलिंग में 32 से अधिक देशों की नियमित और व्यापक भागीदारी हो चुकी है।

मुंबई, 11 मई । पीपुल्स आर्मरेसलिंग फेडरेशन इंडिया (पाफी) और प्रो पंजा लीग ने सोमवार को बड़ी खुशी जताते हुए बताया कि पैरा आर्मरेसलिंग ने ब्रिस्बेन 2032 पैरालंपिक खेलों में शामिल होने के लिए अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति द्वारा तय वैश्विक भागीदारी मानक को पूरा कर लिया है।

विश्व आर्मरेसलिंग महासंघ की ओर से अतिरिक्त भागीदारी आंकड़े जमा किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति ने पुष्टि की कि अब पैरा आर्मरेसलिंग में 32 से अधिक देशों की नियमित और व्यापक भागीदारी हो चुकी है। यह उपलब्धि इस खेल को भविष्य में पैरालंपिक में शामिल किए जाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

इस खबर को भारत के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश में पैरा आर्मरेसलिंग खिलाड़ियों की मजबूत और तेजी से उभरती प्रतिभा मौजूद है। पिछले कुछ वर्षों में पाफी और प्रो पंजा लीग ने पैरा खिलाड़ियों के लिए पेशेवर मंच तैयार करने की दिशा में लगातार काम किया है।

प्रो पंजा लीग के दोनों सत्रों और देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित मेगा मुकाबलों में पैरा आर्मरेसलिंग वर्ग को विशेष स्थान दिया गया। इसके जरिए चंदन कुमार बेहरा, बुट्टा सिंह, श्रीनिवास बीवी, मोहन शर्मा और अरविंद रजक जैसे कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला।

प्रो पंजा लीग के सह-संस्थापक परवीन डबास ने कहा, “यह केवल वैश्विक आर्मरेसलिंग ही नहीं, बल्कि भारत के लिए भी ऐतिहासिक क्षण है। हमने प्रो पंजा लीग और देशभर में आयोजित मेगा मुकाबलों के जरिए पैरा वर्ग में शानदार प्रतिभाएं देखी हैं। शुरू से ही हमारा मानना रहा कि पैरा आर्मरेसलिंग को समान पहचान और अवसर मिलना चाहिए, इसलिए हमने इसे हर सत्र में शामिल किया। यदि यह खेल ब्रिस्बेन 2032 पैरालंपिक का हिस्सा बनता है, तो भारत के पास कई पदक जीतने का मजबूत मौका होगा।”

पीपुल्स आर्मरेसलिंग फेडरेशन इंडिया की अध्यक्ष और एशियाई आर्मरेसलिंग महासंघ की उपाध्यक्ष प्रीति झंगियानी ने कहा, “भारत हमेशा से पैरा खेल प्रतिभाओं का केंद्र रहा है और आर्मरेसलिंग भी इससे अलग नहीं है। देशभर के पैरा खिलाड़ियों से हमें शानदार प्रतिक्रिया मिली है। अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति की यह मान्यता खेल के वैश्विक विकास को दर्शाती है और हमें भारत में पैरा खिलाड़ियों के लिए और अवसर तैयार करने की प्रेरणा देती है। हमें विश्वास है कि सही समर्थन और मंच मिलने पर भारतीय खिलाड़ी विश्व चैंपियन बन सकते हैं।”

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