दिल्ली 19 मई : दिल्ली में कमर्शियल गाड़ी चलाने वाले यूनियनों ने 21 से 23 मई तक तीन दिन की हड़ताल पर जाने की योजना बनाई है। यूनियनों की मांग है कि लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों को देखते हुए टैक्सी और ऑटो के किराए में तुरंत बढ़ोतरी की जाए। इस प्रस्तावित आंदोलन के चलते राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर अपनी मांगें सामने रखी हैं। यूनियन का कहना है कि CNG, पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण चालक वर्ग गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है।
‘चालक शक्ति यूनियन’ के उपाध्यक्ष अनुज कुमार राठौर ने कहा कि मौजूदा स्थिति में मध्यम वर्गीय चालक अपने परिवार का खर्च चलाने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी कारण दिल्ली के अन्य संगठनों के साथ मिलकर यूनियन ने 21, 22 और 23 मई को ‘चक्का जाम’ यानी हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियन ने चालकों से इन तीन दिनों के दौरान गाड़ियां न चलाने की अपील की है। यूनियन नेताओं का कहना है कि यदि सरकार जल्द टैक्सी किराए में बढ़ोतरी को लेकर निर्णय नहीं लेती और एक से दो सप्ताह के भीतर नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाता, तो इस आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा और व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
यूनियन ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उनका कहना है कि इस आंदोलन की जिम्मेदारी पूरी तरह दिल्ली सरकार की होगी, क्योंकि लंबे समय से ईंधन की बढ़ती कीमतों के बावजूद किराया संशोधन नहीं किया गया है। संभावित हड़ताल के कारण दिल्ली में ऑटो, टैक्सी और अन्य कमर्शियल वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है, जिससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खासकर रोजमर्रा के यात्रियों और ऑफिस जाने वालों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है। फिलहाल सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन परिवहन व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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