रायपुर 12 जून । मुख्यमंत्री साय ने बाल श्रम मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की। X पोस्ट में उन्होंने लिखा, हर बच्चे को मिले शिक्षा, सुरक्षा और सपनों को साकार करने का अवसर - यही एक संवेदनशील और विकसित समाज की पहचान है। विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर आइए, बाल श्रम मुक्त भारत के निर्माण का संकल्प लें। अगर इतिहास देखा जाए तो 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों ने विभिन्न विधियों से परिवार कल्याण में योगदान दिया है। ग़रीबी बाल श्रम का सबसे बड़ा कारण है। यूनिसेफ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुनियाँ के विकसित और निम्न भागों के ग्रामीण और गरीब हिस्सों में बच्चों के पास कोई वास्तविक और सार्थक विकल्प नहीं है। और न ही स्कूल और शिक्षक उपलब्ध हैं। जो कि बाल श्रम के अप्राकृतिक परिणाम होते हैं। बीबीसी की रिपोर्ट, इसी तरह, गरीबी का निष्कर्ष निकालती है और भारत में बाल श्रम के कुछ कारण और भी हैं।
बंधुआ बाल श्रम जबरन, या आंशिक रूप से मजबूर, श्रम की एक प्रणाली है जिसके तहत बच्चे या बच्चे के माता-पिता एक ऋणदाता के साथ मौखिक या लिखित समझौता करते हैं। बच्चा ऋण के प्रकार के पुनःर्भुगतान के रूप में कार्य करता है बाल श्रम के परिणाम बड़ी संख्या में बाल पक्षपात की उपस्थिति को आर्थिक कल्याण की दृष्टि से एक गंभीर माइल माना जाता है। जो बच्चे काम करते हैं वे आवश्यक शिक्षा प्राप्त करने में परेशान रहते हैं। उन्हें भौतिक, गूढ़, मानसिक रूप से विकसित होने का अवसर नहीं मिलता। बच्चों की शारीरिक स्थिति के संदर्भ में, बच्चे लंबे समय तक काम के लिए तैयार नहीं होते हैं क्योंकि वे वयस्कों की तुलना में जल्दी अनुरोध कर लेते हैं। यह उनकी शारीरिक स्थिति को कम करता है और बच्चों को बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।
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