June 14, 2026

मोदी-ट्रंप मुलाकात से पहले कांग्रेस ने अमेरिकी नीति और व्यापार समझौते पर जताई चिंता

जी-7 शिखर सम्मेलन से पहले कांग्रेस ने व्यापार, भारतीय नाविकों की मौत और अमेरिका के रुख पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 14 जून । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 17 जून को फ्रांस में प्रस्तावित मुलाकात से पहले कांग्रेस ने केंद्र सरकार से भारत के राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि भारत को ओमान तट के निकट अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते तथा अमेरिकी प्रशासन के हालिया रवैये जैसे विषयों पर अपनी चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखना चाहिए।

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी शीघ्र ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं। ऐसे में देश के नागरिक यह जानना चाहते हैं कि क्या प्रधानमंत्री अमेरिकी कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत के मुद्दे पर भारत की कड़ी आपत्ति दर्ज कराएंगे और क्या वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हुई बातचीत में प्रयुक्त भाषा का विषय भी उठाएंगे।

जयराम रमेश ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर जल्द ही भारत दौरे पर आने वाले हैं। कांग्रेस का आरोप है कि प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते के तहत केंद्र सरकार ने ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे भारतीय किसानों और घरेलू उद्योगों के हित प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा ट्रंप प्रशासन की टैरिफ व्यवस्था को निरस्त किए जाने के बाद भी भारत सरकार ने इस समझौते की शर्तों पर पुनर्विचार नहीं किया है, जो चिंताजनक है।

कांग्रेस नेता ने अमेरिकी विदेश मंत्री की उस टिप्पणी का भी उल्लेख किया, जिसमें भारत द्वारा अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने की संभावित प्रतिबद्धता की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं और भारत को अपने आर्थिक एवं रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए अधिक स्पष्ट और दृढ़ रुख अपनाने की आवश्यकता है।

इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी केंद्र सरकार से अमेरिका के समक्ष भारत की चिंताओं को मजबूती से रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने के बाद भारत के प्रति अमेरिकी रवैया पूरी तरह मित्रतापूर्ण नहीं रहा है। चाहे अमेरिका में कथित रूप से अवैध रूप से रह रहे भारतीय नागरिकों की वापसी का मामला हो, भारतीय उत्पादों पर बढ़े हुए शुल्क हों या आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देशों के साथ अमेरिका की बढ़ती नजदीकियां, इन सभी कारणों से द्विपक्षीय संबंधों में कई बार तनाव की स्थिति उत्पन्न हुई है।

मनीष तिवारी ने कहा कि ऐसे समय में प्रधानमंत्री से अपेक्षा की जाती है कि वे अमेरिकी प्रशासन के समक्ष भारत की चिंताओं, असंतोष और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों को स्पष्ट रूप से रखें। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी संप्रभुता, आर्थिक हितों और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मामलों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहिए।

कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की प्रस्तावित मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के आर्थिक, रणनीतिक और कूटनीतिक हितों के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में देश की अपेक्षा है कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए मजबूत और स्पष्ट संदेश दे।----------

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