July 04, 2026

लिथुआनिया में परमाणु हथियारों पर लगी संवैधानिक रोक हटाने का प्रस्ताव, संसद में संशोधन बिल पेश

विनियस, 04 जुलाई । यूराेपीय देश लिथुआनिया की संसद (सेइमास) में परमाणु हथियारों की तैनाती पर लगी संवैधानिक रोक हटाने के लिए संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया गया है। इस प्रस्ताव को संसद के 141 में से 51 सांसदों का समर्थन प्राप्त है, जिससे इसे औपचारिक रूप से संसद में दर्ज कराया गया है।

प्रस्ताव के तहत संविधान के अनुच्छेद 137 को समाप्त करने की मांग की गई है। इस अनुच्छेद के अनुसार, लिथुआनिया में बड़े पैमाने पर विनाशकारी हथियारों और विदेशी सैन्य ठिकानों की तैनाती पर प्रतिबंध है।

यह पहल राष्ट्रपति गितानास नौसेदा के उस बयान के बाद सामने आई है, जिसमें उन्होंने इस संवैधानिक प्रावधान को "पुराना" बताते हुए कहा था कि बदलते सुरक्षा हालात में देश को भविष्य के विकल्प खुले रखने चाहिए। संसदीय दलों के नेताओं के साथ बैठक के बाद नौसेदा ने कहा कि अधिकांश राजनीतिक दल अनुच्छेद 137 को पूरी तरह हटाने के पक्ष में हैं।

राष्ट्रपति का कहना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण लगातार चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है और लिथुआनिया को नाटो के भीतर किसी "कमजोर कड़ी" या "ग्रे ज़ोन" के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने फिनलैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि नाटो में शामिल होने के बाद वहां भी परमाणु हथियारों से जुड़े प्रतिबंधों में बदलाव किया गया है।

हालांकि, रूस ने लिथुआनिया और अन्य बाल्टिक देशों द्वारा जताई जा रही सुरक्षा चिंताओं को खारिज किया है। मॉस्को का कहना है कि नाटो देशों पर हमला करने का उसका कोई इरादा नहीं है और रूस के कथित खतरे का हवाला देकर पूर्वी यूरोप में सैन्य उपस्थिति बढ़ाई जा रही है।

इस बीच, अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका नाटो के पूर्वी हिस्से के कुछ देशों में अपने परमाणु हथियारों की संभावित तैनाती पर विचार कर रहा है। रूस की सीमा से लगे कई देशों ने ऐसी तैनाती में रुचि भी दिखाई है।

यूरोप में बढ़ते सैन्यीकरण के बीच नाटो नेतृत्व सदस्य देशों से अपनी रक्षा तैयारियां मजबूत करने की अपील कर रहा है। वहीं रूस ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी सीमाओं के निकट नाटो का परमाणु ढांचा स्थापित किया जाता है, तो उसे प्रत्यक्ष सैन्य खतरे के रूप में देखा जाएगा और उसके अनुरूप जवाब दिया जाएगा। साथ ही, रूस ने यह भी कहा है कि वह नाटो के साथ समानता के आधार पर बातचीत के लिए तैयार है।

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