July 10, 2026

नेपाल में पूर्व प्रधानमंत्रियों, पूर्व सेना प्रमुखों, पूर्व प्रधान न्यायाधीशों सहित 13,660 ने जमा कराया संपत्ति का विवरण

काठमांडू, 10 जुलाई । सार्वजनिक पदों पर रहते हुए असामान्य रूपये से संपत्ति अर्जित करने के मामलों की जांच के लिए गठित संपत्ति जांच आयोग को अब तक 13,660 लोगों ने अपनी संपत्ति का विवरण सौंपा है। वहीं, कथित अवैध संपत्ति से जुड़ी 1,500 शिकायतें भी आयोग को प्राप्त हुई हैं।

आयोग के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्रियों, पूर्व प्रधान न्यायाधीशों, पूर्व सेना प्रमुखों से लेकर सरकारी कर्मचारियों तक ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा जमा कराया है। आयोग ने १४ अप्रैल को सार्वजनिक सूचना जारी कर जांच के दायरे में आने वाले पदाधिकारियों से एक महीने के भीतर अपने तथा अपने परिवार के नाम पर मौजूद संपत्तियों का विवरण जमा करने का आह्वान किया था। हालांकि अपेक्षित संख्या में विवरण नहीं मिलने पर आयोग ने समयसीमा बढ़ाकर १५ जुलाई के तक कर दी है।

अब तक पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल और सुशीला कार्की, पूर्व मंत्रिपरिषद अध्यक्ष खिलराज रेग्मी, पूर्व उपप्रधानमंत्री ईश्वर पोखरेल, पूर्व मंत्री ओमप्रकाश अर्याल, रघुजी पंत, युवराज ज्ञवाली सहित कई वरिष्ठ नेताओं, पूर्व प्रधान न्यायाधीश रामकुमार प्रसाद शाह, गोपाल पराजुली, ओमप्रकाश मिश्र, प्रकाशमान सिंह राउत तथा पूर्व प्रधान सेनापति रुक्मांगत कटुवाल, मुख्य सचिव सुमनराज अर्याल, अधिकांश सचिव, लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष उमेश मैनाली, अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग के पूर्व प्रमुख आयुक्त सूर्यनाथ उपाध्याय समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों ने संपत्ति विवरण जमा कराया है।

आयोग के प्रवक्ता गणेश केसी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से प्रतिदिन लगभग 500 लोग विवरण जमा करा रहे हैं। गुरुवार को आयोग को 660 संपत्तियों का विवरण प्राप्त हुआ। आयोग ने जांच के दायरे में आने वाले व्यक्तियों को आयोग में स्वयं उपस्थित होकर, डाक अथवा ई-मेल के माध्यम से भी संपत्ति विवरण जमा करने की सुविधा दी है।

प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने मंत्रिपरिषद की बैठक में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार भण्डारी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय संपत्ति जांच आयोग के गठन का निर्णय लिया था। आयोग पहले चरण में वर्ष 2००६ से लेकर 20२६ मार्च तक सार्वजनिक पदों पर रहे पदाधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्तियों की जांच कर रहा है। इसके बाद वर्ष १९९० से २००६ तक सार्वजनिक पद संभालने वाले व्यक्तियों की संपत्तियों की जांच के लिए अलग से नई सूचना जारी की जाएगी।

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