नई दिल्ली: गुलजार की कविता ही नहीं गाने भी दिल को छू जाते हैं. वह हिंदी फिल्मों के जाने माने गीतकार, कवि, पटकथा लेखक, पॉपुलर डायरेक्टर और शायर भी हैं, जिन्होंने हिंदी के अलावा उर्दू पंजाबी, ब्रज भाषा, खड़ी बोली, मारवाड़ी और हरियाणवी में रचनाएं की. लेकिन क्या आप गुलजार की उस कविता के बारे में जानते हैं, जिसे अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज से एक 55 साल पुरानी फिल्म में पिरोया. वहीं वह सीन इतना इमोशनल सीन बन गया कि आज तक फैंस तारीफ करते नहीं थकते.
हम बात कर रहे हैं गुलजार की उस कविता के बारे में, जिसके बोल हैं- मौत तू एक कविता है...
मुझसे एक कविता वादा है मिलेगी मुझकों
डूबती नव्जों में जब दर्द को नींद आने लगे
जर्द सा चेहरा लिए चांद उफक तक पहुंचे, दिन अभी पानी में हो रात किनारे के करीब,
ना अभी अंधेरा ना उजाला हो ना भी रात ना दिन,
जिस्म जब खत्म हो और रूह को सांस आये,
मुझे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझकों...
गुलजार की ये कविता उस सीन में आती है जब राजेश खन्ना का किरदार अंतिम सांस लेता है. इस इमोशनल कर देने वाले सीन को देख आज भी फैंस तारीफ करते नहीं थकते और राजेश खन्ना के अभिनय की खूब सराहना करते हैं. हालांकि इस फिल्म में इस कविता के अलावा कुछ ऐसे गाने भी हैं, जिसे आज भी फैंस सुनते हैं.
आनंद फिल्म के बारे में
1971 में रिलीज हुई फिल्म आनंद का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी थे. जबकि गुलजार और योगेश ने लिरिक्स लिखे थे. फिल्म में राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, सीमा देओ, सुमित्रा सान्याल, रमेश देओ, जॉनी वॉकर, ललिता पवार, असित सेन, दुर्गा खोटे, दारा सिंह, ललिता कुमार और देव किशन अहम किरदार में नजर आए थे. फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर सलिल चौधरी थे. जबकि लता मंगेशकर मन्ना डे और मुकेश ने इस फिल्म के गानों को आवाज दी थी.
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