गीली मिट्टी की खुशबू , ठंडी हवाएं और बारिश की बूंदों के साथ सावन का महीना शुरु हो जाता है। सावन में लोग सोमवार का व्रत करते हैं और पूरे महीने भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं। हालांकि इस महीने में लोग खाने पीने से जुड़े परहेज भी करते हैं।
स्वास्थ्य के लिहास से भी सावन का महीना काफी सतर्क रहने वाला होता है। इस महीने में मच्छर से और पानी से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। सावन का समय वातावरण में नमी और ठंडक लाता है, आयुर्वेद के अनुसार यही मौसम आपके शरीर में असंतुलन का कारण बनता है। आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा (आशा आयुर्वेदा क्लीनिक) से जानते हैं सावन में क्या नहीं खाना चाहिए?
सावन में बिगड़ जाते हैं वात, पित्त और कफ दोष
वात का असंतुलन- नमी और ठंडी हवा के कारण शरीर में वात बढ़ जाता है। इसके कारण जोड़ों में दर्द, अकड़न, बदन दर्द और थकान होती है।
पित्त का असंतुलन- गर्मी के बाद बारिश का मौसम जमीन से भाप छोड़ता है जो प्रकृति में एसिडिक होता है। इससे शरीर में पित्त बढ़ता है। पेट में जलन और एसिडिटी की परेशानी होती है। जिसका सीधा असर आपकी पाचन क्रिया पर पड़ता है, जिसके कारण खाना पचाने में समय लगता है।
डॉक्टर चंचल शर्मा के मुताबिक अगर आपको भी हल्की सी सर्दी लगने पर सर्दी, खांसी और कफ की समस्या होती है, तो इसका कारण आपका बढ़ा हुआ कफ दोष है। सावन के महीने में अच्छी बारिश होती है, जिससे हवा में नमी बढ़ जाती है और कई तरह के जीवों के पनपने और फैलने के लिए अनुकूल माहौल बनता है। यही वजह है कि बारिश के मौसम में कीड़े-मकोड़ों और दूसरे जीवों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जाती है।
सावन में इन चीजों का सेवन करने से बचें
इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं और कीड़े-मकोड़ों का खतरा भी बढ़ जाता है, ऐसे समय इन खाद्य पदार्थो से बचें। बारिश के मौसम में डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन कम से कम करना चाहिए। खासकर दही तो बिल्कुल नहीं खानी चाहिए।
हरी पत्तेदार सब्ज़ियों का सेवन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनमें मौजूद छोटे कीड़े या सूक्ष्मजीव, जो अक्सर सब्जियों के रंग में घुल-मिल जाते हैं वह बीमारी का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, बैंगन खाने से भी बचना चाहिए।
इस मौसम में खासकर मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए ये आपके पाचन को धीमा करती है और अशुद्ध होने की वजह से कई बीमारियां अपने साथ लाती हैं।
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