September 01, 2026

ISRO का बड़ा मिशन भारत की पृथ्वी अवलोकन क्षमता को मजबूत करने वाला अहम कदम माना जा रहा है।

नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) सितंबर 2026 में श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से अपने GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 (GISAT-1A) उपग्रह को लॉन्च करने की तैयारी में है। यह मिशन भारत की पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) क्षमता को मजबूत करने वाला अहम कदम माना जा रहा है।

EOS-05 मिशन क्या है? EOS-05 एक जियोस्टेशनरी अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है, जिसे धरती की सतह की निगरानी और तेज गति से तस्वीरें उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। यह उपग्रह अंतरिक्ष से बड़े क्षेत्रों की हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग करने में सक्षम होगा।

मौसम और आपदा प्रबंधन में मिलेगी मदद EOS-05 से मिलने वाली तस्वीरों और डेटा का इस्तेमाल कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकेगा— बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी मौसम की बेहतर जानकारी कृषि और पर्यावरण प्रबंधन भूमि उपयोग की निगरानी आपातकालीन स्थिति में तेजी से निर्णय लेने में सहायता GSLV-F17 रॉकेट से होगा प्रक्षेपण

इस मिशन में ISRO अपने GSLV Mk-II (F17) रॉकेट का इस्तेमाल करेगा। यह रॉकेट भारी उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाने के लिए बनाया गया है। भारत की ‘आंख’ बनेगा EOS-05 EOS-05 को भारत की अंतरिक्ष आधारित निगरानी क्षमता बढ़ाने वाला मिशन माना जा रहा है। जियोस्टेशनरी कक्षा में स्थापित होने के कारण यह लगातार एक बड़े क्षेत्र पर नजर रखने में सक्षम होगा। इसकी मदद से बार-बार पृथ्वी की तस्वीरें लेकर बदलावों का अध्ययन किया जा सकेगा और आपदा के समय तेज सूचना मिल सकेगी। ISRO के लिए क्यों अहम है यह मिशन? यह मिशन भारत के रिमोट सेंसिंग और पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम को नई मजबूती देगा। EOS-05 के जरिए ISRO सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिकों और आपदा प्रबंधन संस्थानों को बेहतर डेटा उपलब्ध करा सकेगा।

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