गुजराती संगीत जगत के दिग्गज संगीतकार गौरांग व्यास का निधन
अहमदाबाद, 03 सितंबर। गुजराती फिल्म जगत के जाने-माने संगीतकार और गीतकार स्वर्गीय अविनाश व्यास के पुत्र गौरांग व्यास का बुधवार देररात अहमदाबाद में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही गुजराती फिल्म और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। वे लंबे समय से गुजराती संगीत की दुनिया में सक्रिय थे और 100 से अधिक गुजराती फिल्मों में संगीत दे चुके थे।
गौरांग व्यास ने फिल्म संगीत के अलावा सुगम संगीत, लोकसंगीत, भजन, रास-गरबा, नृत्यनाटिका और टेलीविजन के लिए भी उल्लेखनीय काम किया। गुजराती विश्वकोश के अनुसार वर्ष 2004 तक वे करीब 100 से अधिक गुजराती फिल्मों में संगीत दे चुके थे। इसके अलावा उन्होंने गुजराती गीतकारों और गजलकारों की 500 से अधिक रचनाओं को संगीतबद्ध किया।
गौरांग व्यास ने गुजराती रास-गरबा संगीत में भी कई नए प्रयोग किए। उनके संगीत से जुड़े चर्चित एलबमों में ‘जालारामनी झूंपड़ी’, ‘भजन अनमोल’, ‘गंगा सतीना भजनों’, ‘कहत कबीर’, ‘जालाराम बापानुं हालरड़ु’, ‘प्राचीन प्रभातियां’ और ‘नॉन स्टॉप डांडिया-रास’ शामिल हैं।
गुजराती सिनेमा में ‘लव नी भवई’ जैसी चर्चित फिल्म में उनका संगीत खास तौर पर याद किया जाता है। उनके संगीत से जुड़ी लोकप्रिय रचनाओं में ‘आज वगडावो रूडा शरणाई ने ढोल’ और ‘मने एकली मेलीने’ जैसे गीत शामिल हैं। उनकी कई रचनाएं आज भी गुजराती संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।
उनकी चर्चित रचनाओं में ‘बेना रे’ भी शामिल है। इस गीत को अनुराधा पौडवाल ने आवाज दी थी, इसके गीतकार उनके पिता अविनाश व्यास थे और संगीत गौरांग व्यास ने दिया था। इस तरह यह रचना पिता-पुत्र की संगीत परंपरा का भी एक अनूठा उदाहरण बनी।
गौरांग व्यास को संगीत विरासत में मिला था। उनके पिता अविनाश व्यास गुजराती फिल्म और संगीत जगत के प्रतिष्ठित नामों में शामिल थे। हालांकि गौरांग व्यास ने अपनी प्रतिभा और प्रयोगों के बल पर संगीत की दुनिया में अलग पहचान बनाई और गुजराती संगीत की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाया।
अहमदाबाद में उनके निधन की खबर से उनके प्रशंसकों, कलाकारों और गुजराती फिल्म एवं संगीत जगत से जुड़े लोगों में शोक है। 100 से अधिक फिल्मों और सैकड़ों रचनाओं को संगीत देने वाले गौरांग व्यास भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संगीत लंबे समय तक गुजराती संस्कृति और संगीत प्रेमियों की स्मृतियों में जीवित रहेगा।