September 08, 2026

प्रधानमंत्री व अन्य ने दी भूपेन हजारिका को 100वीं जयंती पर श्रद्धांजलि

नई दिल्ली, 08 सितम्बर । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व अन्य ने मंगलवार को संगीतकार, गायक, गीतकार डॉ. भूपेन हजारिका को उनकी 100वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा," महान डॉ. भूपेन हजारिका को उनकी 100वीं जयंती पर याद कर रहा हूं। उनकी आवाज में असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना समाई थी, जो पूरे देश तक पहुँची। उन्होंने अपने संगीत के जरिए अनगिनत लोगों के विचारों और भावनाओं को बहुत खूबसूरती से व्यक्त किया। उनके गानों ने लोगों को एक-दूसरे के करीब लाया। मुझे पिछले साल गुवाहाटी में उनकी जन्म शताब्दी समारोह की शुरुआत में शामिल होने का सुखद अनुभव याद है। भूपेन दा का जीवन और काम आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।"

ओम बिरला ने कहा कि भारत रत्न से सम्मानित महान संगीतकार, गायक, गीतकार और पूर्वोत्तर सहित संपूर्ण भारत की सांस्कृतिक चेतना के सशक्त स्वर डॉ. भूपेन हज़ारिका के गीतों में लोकजीवन की संवेदनाएं, आम जन की आकांक्षाएं, प्रकृति से जुड़ाव और मानवीय मूल्यों की गहरी अभिव्यक्ति दिखाई देती है। उन्होंने अपनी सृजनशीलता के माध्यम से असम की समृद्ध लोक-संस्कृति और पूर्वोत्तर भारत की आवाज़ को देश-दुनिया तक पहुँचाया। उनकी अमर रचनाएं आज भी संवेदना, सद्भाव और मनुष्यता का संदेश देती हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि संस्कृति के एक महान प्रतीक एवम दूरदर्शी विचारक के तौर पर डॉ. हजारिका ने असम की आत्मा को आवाज दी और अपने संगीत व गहरी मानवीय सोच के जरिए भारत की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया। उनकी कालजयी रचनाएं करुणा, सद्भाव और सामाजिक न्याय के आदर्शों को दर्शाती हैं और देश भर की पीढ़ियों के दिलों को छूती हैं। उनकी अद्भुत विरासत हमें प्रेरित करती रहती है और लोगों को एकजुट करने तथा सीमाओं से परे ले जाने की कला और संस्कृति की स्थायी शक्ति की याद दिलाती है।

केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह ने कहा कि भूपेन दा के संगीत ने असमिया संस्कृति को उसकी तमाम विविधताओं के साथ विश्व मंच पर पहुँचाया और उनके गीतों ने उस भावना को दर्शाया जिसने समाज को सदियों से एकजुट रखा है। उनकी अमर विरासत राष्ट्र-निर्माण के हमारे विजन को प्रेरित करती रहेगी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 'दिल हूम हूम करे...', 'गंगा बहती हो क्यों...', 'समय ओ धीरे चलो...' जैसे असंख्य गीतों के माध्यम से आप हम सबके हृदय में सदैव जिंदा रहेंगे। अपनी अनूठी आवाज, भावपूर्ण रचनाओं और संगीत की अद्भुत साधना से उन्होंने भारतीय संगीत जगत को समृद्ध किया। उनकी कला और संगीत के प्रति समर्पण संगीत प्रेमियों को सर्वदा प्रेरित करता रहेगा।

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