जिन पर संबंधित कैपिटल गेन नियम लागू होते हैं। कब माना जाता है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन? यदि सूचीबद्ध शेयर या पात्र इक्विटी म्यूचुअल फंड यूनिट को 12 महीने से अधिक समय तक रखने के बाद बेचा जाता है तो उससे होने वाला लाभ आम तौर पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है।
मौजूदा नियमों के तहत ऐसे LTCG में एक वित्त वर्ष के दौरान ₹1.25 लाख तक के लाभ पर टैक्स छूट उपलब्ध है। इस सीमा से ज्यादा के पात्र लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति को एक वित्त वर्ष में शेयर बेचने से कुल ₹3 लाख का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ।
इसमें से पहले ₹1.25 लाख छूट की सीमा में आएंगे। इसके बाद ₹1.75 लाख टैक्स योग्य बचेंगे। ₹1.75 लाख का 12.5 प्रतिशत निकालें तो टैक्स ₹21,875 बनता है। इसके ऊपर लागू 4 प्रतिशत हेल्थ एंड एजुकेशन सेस जोड़ने पर कुल देनदारी लगभग ₹22,750 हो सकती है। हालांकि वास्तविक टैक्स व्यक्ति की कुल आय और अन्य लागू प्रावधानों के आधार पर अलग हो सकता है।
शॉर्ट टर्म में कितना टैक्स? यदि सूचीबद्ध इक्विटी शेयर या पात्र इक्विटी म्यूचुअल फंड को खरीदने के 12 महीने के भीतर बेचकर मुनाफा कमाया जाता है और संबंधित शर्तें पूरी होती हैं, तो यह शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। ऐसे पात्र STCG पर वर्तमान में 20 प्रतिशत की विशेष टैक्स दर लागू होती है।
इसलिए केवल यह देखकर टैक्स तय नहीं किया जा सकता कि निवेश 'म्यूचुअल फंड' में है। पहले यह जानना जरूरी है कि वह इक्विटी फंड है, डेट फंड है या किसी दूसरी कैटेगरी की स्कीम। ₹3 लाख का मुनाफा यानी ₹3 लाख की बिक्री नहीं नए निवेशकों के बीच एक आम भ्रम यह भी है कि शेयर बेचने पर खाते में आई पूरी रकम पर टैक्स लगता है। ऐसा नहीं है। कैपिटल गेन की गणना सामान्यतः बिक्री मूल्य और निवेश की लागत के अंतर तथा लागू समायोजनों के आधार पर होती है।
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