October 21, 2026

आप घर पर ही अलग-अलग अनाज मिलाकर 5 किलो मल्टीग्रेन आटा तैयार कर सकते हैं।

आजकल बदलती जीवनशैली और खानपान के कारण लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से अधिक जागरूक हो रहे हैं। ऐसे में मल्टीग्रेन आटे की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। आमतौर पर घरों में गेहूं के आटे से रोटियां बनाई जाती हैं, लेकिन अगर इसमें रागी, ज्वार, बाजरा, चना और अन्य अनाज सही मात्रा में मिलाए जाएं, तो रोटियों में पोषक तत्वों की विविधता बढ़ाई जा सकती है। खास बात यह है कि मल्टीग्रेन आटा तैयार करने के लिए बाजार से महंगा पैकेट खरीदना जरूरी नहीं है।

आप घर पर ही अलग-अलग अनाज मिलाकर 5 किलो मल्टीग्रेन आटा तैयार कर सकते हैं।हालांकि, मल्टीग्रेन आटा बनाते समय अनाज का सही अनुपात रखना जरूरी है। अगर किसी एक मोटे अनाज की मात्रा बहुत अधिक हो जाए, तो रोटी का स्वाद और बनावट बदल सकती है। इसलिए गेहूं के साथ दूसरे अनाज संतुलित मात्रा में मिलाना बेहतर विकल्प हो सकता है।


5 किलो मल्टीग्रेन आटा बनाने के लिए सामग्री कुल मिश्रण — 5,000 ग्राम | गेहूं | 3,000 ग्राम | | ज्वार | 500 ग्राम | | बाजरा | 400 ग्राम | | रागी | 400 ग्राम | | चना | 400 ग्राम | | जौ | 300 ग्राम | | कुल | 5,000 ग्राम | यह घरेलू उपयोग के लिए एक सुझाया गया मिश्रण है, कोई अनिवार्य पोषण अनुपात नहीं। अपनी पसंद, पाचन क्षमता और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के अनुसार अनाज की मात्रा बदली जा सकती है। घर पर मल्टीग्रेन आटा बनाने का आसान तरीका

सबसे पहले गेहूं, ज्वार, बाजरा, रागी, चना और जौ को अच्छी तरह साफ कर लें। इनमें मौजूद कंकड़, धूल और अन्य अशुद्धियों को निकाल दें।सभी अनाज पूरी तरह सूखे होने चाहिए। यदि उन्हें धोया गया है, तो पिसवाने से पहले अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, ताकि नमी के कारण आटा जल्दी खराब न हो।इसके बाद सभी अनाज को निर्धारित मात्रा में मिलाएं और आटा चक्की पर बारीक पिसवा लें। तैयार आटे को साफ, सूखे और एयरटाइट डिब्बे में रखें।

गेहूं के साथ रागी मिलाने के फायदे रागी को फिंगर मिलेट भी कहा जाता है। यह कैल्शियम और फाइबर का अच्छा स्रोत है। कैल्शियम हड्डियों और दांतों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होता है।वहीं, गेहूं में मौजूद ग्लूटेन रोटी को मुलायम और बेलने योग्य बनाने में मदद करता है। यही कारण है कि इस मिश्रण में गेहूं की मात्रा सबसे अधिक रखी गई है। ज्वार और बाजरा क्यों हैं फायदेमंद? ज्वार और बाजरा पोषक तत्वों से भरपूर मोटे अनाज हैं। इनमें फाइबर, खनिज और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं।

ज्वार में मौजूद फाइबर पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। वहीं, बाजरा आयरन और मैग्नीशियम जैसे खनिज प्रदान करता है।इन अनाजों को भोजन में शामिल करने से आहार में विविधता बढ़ती है। हालांकि, केवल मल्टीग्रेन रोटी खाने से किसी बीमारी का इलाज या निश्चित रूप से वजन कम होने की गारंटी नहीं होती।

चना और जौ से बढ़ेगी पौष्टिकता मल्टीग्रेन आटे में चना शामिल करने से प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने में मदद मिल सकती है। प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों और ऊतकों के रखरखाव के लिए जरूरी है।जौ में बीटा-ग्लूकान नामक घुलनशील फाइबर पाया जाता है। पर्याप्त मात्रा में इसका सेवन संतुलित आहार के हिस्से के रूप में कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन में सहायक हो सकता है।ध्यान रखें कि गेहूं और जौ दोनों में ग्लूटेन होता है। इसलिए यह मिश्रण सीलिएक रोग या चिकित्सकीय रूप से आवश्यक ग्लूटेन-मुक्त आहार लेने वालों के लिए उपयुक्त नहीं है।

मल्टीग्रेन आटे को कितने दिन तक रखें? मल्टीग्रेन आटे में विभिन्न अनाजों के प्राकृतिक तेल मौजूद होते हैं, इसलिए यह गर्मी और नमी के संपर्क में जल्दी खराब हो सकता है।बेहतर होगा कि आटा कम मात्रा में पिसवाएं। अधिक मात्रा में तैयार करने पर इसे छोटे एयरटाइट डिब्बों में बांटकर ठंडी और सूखी जगह रखें। लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए रेफ्रिजरेटर या फ्रीजर का उपयोग कर सकते हैं।यदि आटे से बासी या कड़वी गंध आने लगे, फफूंद दिखाई दे या कीड़े लग जाएं, तो उसका उपयोग नहीं करना चाहिए।

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