October 24, 2026

ईरान की अमेरिका को चेतावनी : ‘फारस की खाड़ी में लौटने का सपना ही देख सकता है वॉशिंगटन’

तेहरान, 24 अक्टूबर । ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ प्रमुख मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि वॉशिंगटन केवल फारस की खाड़ी में दोबारा अपनी सैन्य मौजूदगी स्थापित करने का सपना देख सकता है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना अमेरिकी नौसेना को इस रणनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करने से रोकने के लिए तैयार है।

ईरान सरकार की अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क प्रेस टीवी

के मुताबिक, अब्दुल्लाही ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका की सैन्य ताकत को लेकर किए जा रहे दावे और ईरान की क्षमताओं को लेकर उसके आकलन में विरोधाभास है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना की क्षमताओं और क्षेत्र में उसकी मौजूदगी को लेकर ईरानी कमांडर के दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

ईरानी सैन्य प्रमुख ने कहा कि उनका देश किसी भी परिस्थिति में अमेरिकी सैन्य जहाजों को फारस की खाड़ी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना की क्षमताओं को ईरानी सैन्य कार्रवाई से गंभीर नुकसान पहुंचा है।

अब्दुल्लाही ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी सेना और युद्धपोतों की इस क्षेत्र में वापसी की केवल कल्पना कर सकते हैं। उनके बयान से संकेत मिलता है कि तेहरान फारस की खाड़ी और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का विरोध जारी रखना चाहता है। उन्हाेंने ट्रम्प के उन बयानों पर भी सवाल उठाया, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया था कि ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट कर दिया गया है।

ईरानी कमांडर ने सवाल किया कि यदि परमाणु ठिकाने पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं, तो अमेरिकी प्रशासन इस मुद्दे को बार-बार क्यों उठा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयानों का उद्देश्य अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जनता को प्रभावित करना है।

अमेरिका लंबे समय से यह सुनिश्चित करने पर जोर देता रहा है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न करे। दूसरी ओर, तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगाए जाने वाले कई आरोपों को खारिज करता रहा है।

फारस की खाड़ी से अरब सागर की ओर जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल और गैस का परिवहन होता है। यहां सैन्य टकराव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

अब्दुल्लाही ने सवाल उठाया कि यदि ईरान की सैन्य क्षमताएं कमजोर हो चुकी हैं, जैसा कि वॉशिंगटन दावा करता है, तो अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान की समुद्री सीमाओं के करीब आने से क्यों बचते हैं?

हालांकि, इस बयान को ईरानी कमांडर के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। समुद्री क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

अब्दुल्लाही ने कहा कि ईरान का राजनीतिक नेतृत्व, जनता, सैन्य बल और अधिकारी अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ अपनी रणनीति जारी रखने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने दावा किया कि संघर्ष जितना लंबा चलेगा, विरोधी देशों को उतनी ही अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

ईरानी पक्ष ने जून 2025 में हुए 12 दिवसीय संघर्ष और 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए दूसरे सैन्य टकराव का हवाला देते हुए दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई ने विरोधियों को युद्धविराम स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। इन घटनाओं और युद्धविराम से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

फिलहाल, ईरानी सैन्य नेतृत्व के ताजा बयान से स्पष्ट है कि तेहरान फारस की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी का विरोध कर रहा है। दूसरी ओर, इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर अमेरिका की नीति भी विवाद का प्रमुख विषय बनी हुई है।

Advertisement








Tranding News

Get In Touch

[email protected]

Follow Us

© Hind Kesari24. All Rights Reserved.