October 25, 2026

रायपुर में नुआखाई भेंटघाट का भव्य आयोजन, राष्ट्रपति मुर्मु की उपस्थिति बनी खास

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नुआखाई भेंटघाट का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष पहचान दी। नुआखाई पश्चिमी ओडिशा सहित कई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला प्रमुख कृषि पर्व है, जो नई फसल के स्वागत, प्रकृति के प्रति आभार और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। छत्तीसगढ़ में भी ओडिया समाज के लोग इस पर्व को परंपरागत उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। नुआखाई के अवसर पर लोग नई फसल से प्राप्त अनाज को देवी-देवताओं को अर्पित करते हैं और परिवार तथा समाज के लोगों के साथ खुशियां साझा करते हैं। रायपुर में आयोजित भेंटघाट कार्यक्रम ने इसी सांस्कृतिक परंपरा, आपसी मेल-मिलाप और सामाजिक सद्भाव को सामने लाने का अवसर प्रदान किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मौजूदगी ने आयोजन को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व दिया और ओडिया संस्कृति की समृद्ध विरासत को रेखांकित किया। ऐसे आयोजनों में पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से क्षेत्रीय परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। नुआखाई केवल फसल उत्सव नहीं, बल्कि परिवारों के एक साथ आने, बड़ों का आशीर्वाद लेने और पुराने मतभेद भुलाकर नई शुरुआत करने का संदेश भी देता है। भेंटघाट का अर्थ भी लोगों के आपसी मिलन और शुभकामनाओं के आदान-प्रदान से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच ऐतिहासिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों में भाषा, खानपान, लोककला और त्योहारों की परंपराओं में भी समानताएं देखने को मिलती हैं। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन इन संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राष्ट्रपति की सहभागिता से समाज के लोगों को अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। साथ ही, नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने और पारंपरिक त्योहारों के महत्व को समझाने में भी ऐसे कार्यक्रम उपयोगी साबित होते हैं। रायपुर में आयोजित नुआखाई भेंटघाट ने कृषि संस्कृति, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विविधता के महत्व को रेखांकित किया। हालांकि, कार्यक्रम में प्रस्तुतियों, अतिथियों और आयोजन से जुड़ी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही विशिष्ट विवरण जोड़े जाने चाहिए। कुल मिलाकर, यह आयोजन छत्तीसगढ़ में विभिन्न समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं के सम्मान और आपसी सद्भाव की भावना को सामने लाने वाला अवसर रहा।

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