अतिक्रमण हटाने ‘टीम प्रहरी’ की महिलाओं ने बदली रायपुर के सड़कों की तस्वीर
रायपुर, 17 अप्रैल । रायपुर में सड़कों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि यह साहस, धैर्य और बदलाव की एक ऐसी कहानी बन गई है, जिसे ‘टीम प्रहरी’ की महिलाएं हर दिन जी रही हैं। करीब एक साल पहले शुरू हुई इस पहल में 20 महिलाओं को शामिल किया गया था, जिनकी जिम्मेदारी थी कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं से जुड़े मामलों को संभाला जाए, लेकिन धीरे-धीरे इन महिलाओं ने अपनी भूमिका को सीमित दायरे से बाहर निकालकर पूरे ऑपरेशन का अहम चेहरा बना दिया। आज ये महिलाएं न सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में बराबरी से हिस्सा ले रही हैं, बल्कि कई बार सबसे आगे खड़े होकर हालात को नियंत्रित भी करती हैं।
इन महिलाओं के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। शुरुआत में परिवार और समाज दोनों की ओर से कई तरह के सवाल खड़े किए गए। यह कहा गया कि यह काम जोखिम भरा है, लड़कियों के लिए ठीक नहीं है, शादी और बच्चों की जिम्मेदारियों पर असर पड़ेगा। लेकिन इन सब आशंकाओं के बावजूद महिलाओं ने पीछे हटने के बजाय इस चुनौती को स्वीकार किया। आज हालात बदल चुके हैं। जो परिवार पहले चिंतित थे, अब वही गर्व महसूस करते हैं कि उनकी बेटियां शहर की व्यवस्था को बेहतर बनाने में भूमिका निभा रही हैं। टीम की सदस्य संतोषी सोनी कहती हैं कि, अब वे काम करते समय महिला या पुरुष के रूप में नहीं सोचतीं, बल्कि एक जिम्मेदार कर्मचारी के रूप में अपनी ज़िम्मेदारी निभाती हैं।
मैदान में उतरने के बाद इन महिलाओं को हर दिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। एम्स के पास सांभर-बड़ा के एक ठेले को हटाने की कार्रवाई के दौरान एक महिला ने टीम को अपशब्द कहना शुरू कर दिया। माहौल तनावपूर्ण हो गया, लेकिन टीम की सदस्य बिंदिया ने संयम नहीं खोया और स्थिति को संभाल लिया। इसी तरह पचपेड़ी नाका में कार्रवाई के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि अपशब्द कहने पर एफआईआर दर्ज करानी पड़ी। कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब लोग कार्रवाई को व्यक्तिगत तौर पर लेने लगते हैं, क्योंकि टीम के सामने वही महिलाएं खड़ी दिखाई देती हैं, जिनसे उनका सीधा सामना होता है। ऐसे में प्रभावितों का गुस्सा सबसे पहले इन्हीं महिलाओं पर निकलता है।
खमतराई जोन में एक कपड़ा दुकान के बाहर विवाद बढ़ा, तो महिलाओं ने खुद आगे बढ़कर एक युवक को घेरकर समझाया और स्थिति को बिगड़ने से रोका। कई बार ऐसा भी हुआ कि महिलाओं की मौजूदगी के बावजूद पुरुष आक्रामक हो गए और स्थिति और ज्यादा तनावपूर्ण हो गई। ऐसे समय में टीम को मजबूती से खड़ा रहना पड़ता है और जरूरत पड़ने पर सख्ती भी करनी पड़ती है।
इन महिलाओं को सिटी कोतवाली में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिसने उन्हें न केवल सख्त बनाया है, बल्कि संवेदनशील भी रखा है। यही वजह है कि कार्रवाई के दौरान जब ठेला या गुमटी हटाई जाती है और लोग भावुक होकर रोने लगते हैं, तो यही महिलाएं उन्हें समझाती हैं कि उनका सामान सुरक्षित रहेगा और वे उसे बाद में ले सकते हैं। टीम की सदस्य बताती हैं कि उनका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि शहर की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
कार्रवाई के दौरान कई बार दबाव और लालच भी सामने आते हैं। पैसे देने के प्रस्ताव, पहचान का हवाला और सिफारिशें—यह सब इस काम का हिस्सा हैं, लेकिन टीम ने शुरू से ही यह तय कर लिया है कि किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। यही ईमानदारी उनकी पहचान बनती जा रही है और लोगों के बीच उनके प्रति भरोसा भी बढ़ा रही है।
शुरुआत में इस पहल को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया मिली-जुली थी। कई लोग इसे सख्ती के रूप में देखते थे और नाराजगी जताते थे, लेकिन समय के साथ तस्वीर बदलने लगी है। अब सड़कों के चौड़े होने और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार को लोग महसूस कर रहे हैं। नगर निगम पहले भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करता रहा है, लेकिन महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बाद उसका असर ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
टीम की सदस्य पिंकी बताती हैं कि, शुरुआत में परिचित लोग भी ताने देते थे और उनके काम को लेकर सवाल उठाते थे। लेकिन अब वही लोग समझ रहे हैं कि यह काम क्यों जरूरी है। समाज में इस बदलाव को महिलाएं अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती हैं। उनके लिए यह केवल नौकरी नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसके जरिए वे शहर को बेहतर बना रही हैं।
टीम प्रहरी में इन महिलाओं की है अहम भूमिका -कविता नायक, कहकशां परवीन, कांता निहाल, सुकांति सिक्का, बिंदिया नाग, विमला ताण्डी, मंजु आमदे, पिंकी निहाल, रोमा मेरी अरोरा, कल्पना बघेल, गौरी साहू, गौतमा मेश्राम, डॉली भिवंडे, पूर्णिमा बघेल, छुनकी हरपाल, तुलिका कौशल, ममता भिवंडे, लता ताण्डी, समीमा बेगम तथा संतोषी सोनी।
'टीम प्रहरी' की महिला टीम आज सिर्फ कार्रवाई का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि बदलाव की अग्रिम पंक्ति में खड़ी वो महिलाएं हैं, जो हर दिन यह साबित कर रही हैं कि हिम्मत और जिम्मेदारी के सामने कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती।