डीजीजीआई रायपुर जोनल यूनिट ने 6.93 करोड़ के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले में इस्पात कारोबारी हरीश वाधवानी को गिरफ्तार कर लिया है।
रायपुर, 17 जून। वस्तु एवं सेवा कर आसूचना महानिदेशालय (डीजीजीआई ) रायपुर जोनल यूनिट ने 6.93 करोड़ के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले में इस्पात कारोबारी हरीश वाधवानी को गिरफ्तार कर लिया है। वह ओम किरण इस्पात उद्योग के पार्टनर हैं और पिछले करीब 5 महीनों से फरार चल रहा था ।
डीजीजीआई रायपुर केअनुसार, "ओम किरण इस्पात उद्योग फर्जी, अस्तित्वहीन और गैर-संचालित फर्मों के नेटवर्क के जरिए अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने के मामले में जांच के दायरे में थी।
जांच में स्पष्ट हुआ है कि इस फर्म ने बिना किसी वास्तविक माल की खरीद की। फर्जी बिलों के आधार पर ₹6.93 करोड़ का अवैध अवैध इनपुट टैक्स प्राप्त किया और उसका उपयोग कर सरकारी राजस्व को भारी चपत लगाई।"सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद पांच माह से फरार आरोपित को मंगलवार को पकड़ा गया। रायपुर जोनल यूनिट ने उन्हें रायपुर शहर से ही घेराबंदी करके गिरफ्तार किया है। इससे पहले आरोपित के भाई संतोष वाधवानी को भी विभाग द्वारा ₹14 करोड़ की टैक्स चोरी के एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है।
यह कार्रवाई एडिशनल डायरेक्टर जनरल सुजीत मलिक के नेतृत्व में की गई। डीजीजीआइ ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) अधिनियम की धारा के तहत यह गिरफ्तारी की है।
डीजीजीआइ अधिकारियों की जांच में पता चला है कि ओम किरण इस्पात उद्योग कई अस्तित्वहीन, फर्जी और गैर-संचालित फर्मों के बहुस्तरीय नेटवर्क से जुड़ा था। इन्हीं फर्मों के माध्यम से फर्जी बिल जारी कर अवैध आइटीसी प्राप्त किया जा रहा था। जांच के दौरान जीएसटी रिटर्न, जीएसटीआर-2ए और अन्य दस्तावेजों के विश्लेषण में पाया गया कि बड़ी मात्रा में आइटीसी ऐसे जीएसटी पंजीकरणों से लिया गया था, जिन्हें बाद में विभाग द्वारा निलंबित या निरस्त कर दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार आरोपित पिछले करीब पांच माह से जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने विभिन्न न्यायालयों में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन भी लगाए। मामला अंततः सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन वहां से भी उसे राहत नहीं मिली। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद डीजीजीआइ की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने बयान में बताया है कि जांच टीम अब इस फर्जी बिलिंग नेटवर्क के पीछे सक्रिय अन्य सहयोगियों, कागजी कंपनियों को रजिस्टर करने वाले मास्टरमाइंड और इस घोटाले के वास्तविक वित्तीय लेनदेन की गहराई से कस्टोडियल पूछताछ कर रही है।