महिलाओं को टक्कर मारकर बनाता था वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल कर कमाता था पैसा, 'रोड सेफ्टी वाला' गिरफ्तार
नई दिल्ली, 27 जून । सोशल मीडिया पर 'रोड सेफ्टी वाला' नाम से महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाकर वीडियो बनाने वाले युवक को पश्चिमी जिला साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह सड़क पर महिलाओं और किशोरियों की स्कूटी या बाइक को जानबूझकर पीछे से टक्कर मारता था। इसके बाद उनका पीछा करते हुए अभद्र टिप्पणी करता, पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड करता और बिना अनुमति फेसबुक व यूट्यूब पर अपलोड कर उसे वायरल करता था। उसका मकसद सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स बढ़ाना, वीडियो वायरल करना और मोनेटाइजेशन के जरिए कमाई करना था।
पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त हरेश्वर स्वामी ने शनिशार काे बताया कि आरोपित के कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया है, जिसमें उसके सोशल मीडिया अकाउंट, वीडियो, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले हैं। पुलिस ने उसके फेसबुक और यूट्यूब अकाउंट हटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है।
नाबालिग बेटियों की शिकायत से हुआ खुलासा
पश्चिमी जिला पुलिस के अनुसार, दो जून 2026 को राजा गार्डन निवासी सनी अरोड़ा ने साइबर थाना पश्चिम में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी दो नाबालिग बेटियां स्कूटी से जा रही थीं। इसी दौरान बाइक सवार दो युवकों ने उनकी स्कूटी को जानबूझकर पीछे से टक्कर मार दी। इसके बाद दोनों युवकों ने उनका पीछा किया और रास्ते भर अभद्र टिप्पणियां करने के साथ गाली-गलौज भी की। कुछ दिनों बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि उनकी बेटियों के वीडियो @bikeronroad33 नाम के यूट्यूब चैनल और 'Road Safety Wala' नाम के फेसबुक पेज पर अपलोड किए गए हैं। इसके बाद साइबर थाना पश्चिम में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के तहत एफआईआर संख्या 29/2026 दर्ज की गई।
महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को ही बनाता था निशाना
प्राथमिक जांच के दौरान पुलिस ने आरोपित के सोशल मीडिया अकाउंट खंगाले। जांच में सामने आया कि उसके अधिकांश वीडियो महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाकर बनाए गए थे। आरोप है कि वह सड़क पर अकेली चल रही महिला या लड़की की स्कूटी या बाइक को पीछे से हल्की टक्कर मारता था। घटना के तुरंत बाद वह "सॉरी दीदी" कहकर खुद को निर्दोष दिखाने की कोशिश करता, ताकि किसी को उस पर शक न हो। इसी दौरान उसका साथी या वह खुद पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लेता था। बाद में इन वीडियो को बिना पीड़ितों की अनुमति के फेसबुक और यूट्यूब पर अपलोड कर देता था। इन वीडियो को सनसनीखेज शीर्षक देकर वायरल करने की कोशिश की जाती थी, जिससे ज्यादा से ज्यादा व्यूज मिल सकें।
विशेष टीम ने डिजिटल फॉरेंसिक से पकड़ा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिमी जिला पुलिस ने एसीपी ऑपरेशन विजय सिंह की देखरेख में साइबर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विकास कुमार बुलदाक के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की। टीम में एसआई निधि शर्मा, हेड कांस्टेबल सुनील और कांस्टेबल संदीप शामिल थे। टीम ने सोशल मीडिया अकाउंट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की। डिजिटल फॉरेंसिक और तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी की पहचान गुरमन सिंह उर्फ 'रोड सेफ्टी वाला' (32) निवासी सुभाष नगर, दिल्ली के रूप में हुई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपित के कब्जे से एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। प्रारंभिक जांच में उसी फोन से 'Road Safety Wala' नाम का फेसबुक पेज और @bikeronroad33 यूट्यूब चैनल संचालित होने की पुष्टि हुई। फोन से कई वीडियो, स्क्रीनशॉट, सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ा डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी बरामद हुए, जो आरोपी को आपत्तिजनक वीडियो बनाने और अपलोड करने से जोड़ते हैं।
पूछताछ में कबूला पूरा खेल
पूछताछ में आरोपित ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसने सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने, अधिक से अधिक फॉलोअर्स जुटाने और फेसबुक व यूट्यूब के मोनेटाइजेशन से पैसा कमाने के उद्देश्य से इस तरह के वीडियो बनाने शुरू किए थे। उसने यह भी स्वीकार किया कि वह जानबूझकर महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को निशाना बनाता था, क्योंकि ऐसे वीडियो पर ज्यादा व्यूज, लाइक और कमेंट मिलते थे। उसने यह भी माना कि ऐसा करना उसे व्यक्तिगत संतुष्टि भी देता था। पुलिस के अनुसार आरोपित के यूट्यूब चैनल @bikeronroad33 पर करीब 21 हजार फॉलोअर हैं, जबकि उसके फेसबुक पेज 'Road Safety Wala' को करीब 2.10 लाख लोग फॉलो करते हैं। इन्हीं प्लेटफॉर्म पर वह लगातार ऐसे वीडियो अपलोड करता था।
अकाउंट हटाने की प्रक्रिया शुरू, और पीड़ितों की तलाश
पुलिस ने आरोपित के सोशल मीडिया अकाउंट हटाने (टेकडाउन) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि उसने अब तक कितनी महिलाओं और नाबालिग लड़कियों को इस तरह निशाना बनाया। पुलिस अन्य संभावित पीड़ितों और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।