July 16, 2026

रोहिंग्या-बांग्लादेशी घुसपैठ और अवैध पुनर्वास नेटवर्क पर ईडी की दिल्ली समेत कई राज्यों में छापेमारी

नई दिल्ली, 16 जुलाई। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की अवैध घुसपैठ, फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराने तथा उनके भारत में स्थायी पुनर्वास से जुड़े धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में गुरुवार को पश्चिम बंगाल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई जगहों पर व्यापक छापेमारी की। यह छापेमारी एक संगठित गिरोह पर अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए अवैध घुसपैठ कराने, फर्जी आधार, पैन कार्ड और पासपोर्ट बनवाने तथा विदेशी धन के सहारे घुसपैठियों को देश में बसाने के आरोप में की गई।

ईडी के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गुरुवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल), फरीदाबाद (हरियाणा), देवबंद (सहारनपुर, उत्तर प्रदेश), दिल्ली और अन्य स्थानों पर तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान डिजिटल उपकरण, दस्तावेज और अन्य आपत्तिजनक सामग्री जब्त करके उनकी जांच की जा रही है। संबंधित व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि एक संगठित सिंडिकेट रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने के बाद उनकी पहचान बदलने का काम करता था। इसके लिए फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट तैयार कराए जाते थे। इसके बाद इन लोगों को रोजगार या अन्य कारणों से देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता था।

ईडी के अनुसार जांच में यह भी पता चला कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत कुछ सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट इस नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इन ट्रस्टों को ब्रिटेन स्थित संस्थाओं से धन प्राप्त होता था, जिसे बाद में छह हजार, आठ हजार और दस हजार रुपये जैसी छोटी-छोटी किश्तों में संदिग्ध व्यक्तियों को भेजा जाता था, ताकि उन्हें भारत में बसने में मदद मिल सके।

एजेंसी ने बताया कि धन का अंतिम उपयोग अवैध प्रवासियों के आर्थिक पुनर्वास के लिए किया जाता था, जिससे वे भारत में स्थायी रूप से बस सकें। इसके तहत कुछ लोगों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए धन, रोजगार के अवसर या नकद सहायता उपलब्ध कराई जाती थी। ईडी के मुताबिक पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय एक समूह अवैध घुसपैठ कराने में मदद करता था, जबकि दूसरा समूह इन घुसपैठियों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का काम करता था। दोनों समूहों के बीच समन्वय के जरिए अवैध प्रवासियों को देश के विभिन्न हिस्सों में भेजा जाता था।

तलाशी अभियान में उत्तर 24 परगना स्थित कबीरबाग मिल्लत अकादमी, हरोआ अल-जमीयतुल इस्लामिया दारुल उलूम, तहिरिया वेलफेयर ट्रस्ट, दक्षिण दिल्ली के बाटला हाउस क्षेत्र में कुछ आवासीय परिसर, फरीदाबाद, देवबंद तथा पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में स्थित कई व्यक्तियों और संस्थाओं के ठिकाने शामिल किये गए। ईडी ने कहा कि जब्त डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेज की विस्तृत जांच की जा रही है तथा मामले में आगे की जांच जारी है।

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