September 03, 2026

मानसून वर्कआउट

मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है लेकिन बारिश के दिनों में फिसलन के कारण चोट लगने का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर नियमित वर्कआउट, रनिंग, जॉगिंग या आउटडोर एक्सरसाइज करने वाले लोगों के लिए थोड़ी सी लापरवाही परेशानी खड़ी कर सकती है। गीली सड़क, सीढ़ियां, जिम का फर्श या पार्क की पगडंडी पर पैर फिसलने से मोच, फ्रैक्चर और मांसपेशियों में चोट लग सकती है। गंभीर मामलों में रीढ़, घुटने या कूल्हे की चोट लंबे समय तक परेशान कर सकती है।

बारिश में सबसे आम समस्या गीली और फिसलन वाली सतह होती है। सड़क पर जमा पानी के नीचे गड्ढा या टूटी हुई सतह दिखाई नहीं देती। तेज दौड़ते समय पैर अचानक गड्ढे में पड़ने से टखना मुड़ सकता है। इसलिए बारिश के दौरान आउटडोर वर्कआउट करते समय सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा सावधानी जरूरी है। सही जूते बेहद जरूरी मानसून में वर्कआउट करते समय अच्छी ग्रिप वाले जूतों का इस्तेमाल करना चाहिए। पुराने और घिसे हुए जूतों के तलवे गीली सतह पर आसानी से फिसल सकते हैं। रनिंग या जॉगिंग करने वाले लोगों को ऐसे फुटवियर चुनने चाहिए जिनकी पकड़ मजबूत हो और जो पैर को पर्याप्त सपोर्ट दें।

गीले जूते पहनकर लंबे समय तक एक्सरसाइज करना भी सही नहीं है। इससे पैरों में फंगल संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वर्कआउट के बाद पैरों को अच्छी तरह साफ और सूखा रखना जरूरी है। वार्मअप को नजरअंदाज न करें एक्सरसाइज शुरू करने से पहले वार्मअप महत्वपूर्ण है। बारिश के मौसम में शरीर और मांसपेशियों को गतिविधि के लिए तैयार करने के लिए कुछ मिनट हल्का वार्मअप करना फायदेमंद हो सकता है। अचानक तेज एक्सरसाइज शुरू करने से मांसपेशियों में खिंचाव या चोट लगने का जोखिम बढ़ सकता है।

हल्की स्ट्रेचिंग, धीमी चाल और नियंत्रित गतिविधियों से शुरुआत की जा सकती है। वर्कआउट की तीव्रता धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर रहता है। गीली सतह पर दौड़ने से बचें बारिश के दौरान सड़क, पार्क, सीढ़ियां और टाइल्स बेहद फिसलन भरी हो सकती हैं। ऐसी सतह पर तेज दौड़ना जोखिम बढ़ा सकता है। अगर बाहर तेज बारिश हो रही हो तो रनिंग की जगह सुरक्षित इनडोर वर्कआउट विकल्प चुना जा सकता है। घर पर योग, बॉडीवेट एक्सरसाइज या अन्य सुरक्षित गतिविधियां की जा सकती हैं। हालांकि घर या जिम में भी फर्श पर पानी या पसीना दिखाई दे तो पहले उसे साफ करना जरूरी है।

जरूरत से ज्यादा वजन उठाने से बचें बारिश के दिनों में जिम के अंदर भी फिसलन का खतरा हो सकता है। गीले हाथों से डंबल या बारबेल पकड़ने पर पकड़ कमजोर हो सकती है। इसलिए भारी वजन उठाने से पहले हाथ और उपकरण पूरी तरह सूखे होने चाहिए। अपनी क्षमता से ज्यादा वजन उठाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। गलत तकनीक से किया गया वर्कआउट कमर, कंधे और घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। दर्द को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी वर्कआउट के दौरान अचानक तेज दर्द, सूजन या चलने में परेशानी महसूस हो तो एक्सरसाइज रोक देना चाहिए। चोट के बावजूद लगातार वर्कआउट करने से समस्या गंभीर हो सकती है। अगर गिरने के बाद किसी हिस्से में ज्यादा सूजन हो, वजन डालने में परेशानी हो, तेज दर्द बना रहे या हाथ-पैर की गतिविधि प्रभावित हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। सिर या रीढ़ पर चोट लगने की स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। पानी पीना न भूलें मानसून में तापमान कम होने के कारण प्यास कम महसूस हो सकती है लेकिन एक्सरसाइज के दौरान शरीर से पसीने के जरिए पानी निकलता रहता है। इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। लंबे या अधिक तीव्र वर्कआउट में व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार तरल और इलेक्ट्रोलाइट की आवश्यकता भी हो सकती है। आउटडोर वर्कआउट में मौसम पर रखें नजर बारिश के साथ बिजली चमक रही हो या तेज तूफान हो तो खुले मैदान, छत या पार्क में एक्सरसाइज करने से बचना चाहिए। जलभराव वाले क्षेत्रों में भी रनिंग या साइकिलिंग जोखिम भरी हो सकती है क्योंकि पानी के नीचे गड्ढे और दूसरी बाधाएं दिखाई नहीं देतीं। मानसून में फिटनेस रूटीन बंद करने की जरूरत नहीं है लेकिन परिस्थितियों के अनुसार उसमें बदलाव करना जरूरी है। सही जूते, सुरक्षित सतह, पर्याप्त वार्मअप और नियंत्रित वर्कआउट से चोट के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिटनेस के लिए नियमित एक्सरसाइज जरूरी है लेकिन सुरक्षा उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। बारिश के मौसम में जरा सी फिसलन गंभीर चोट का कारण बन सकती है। इसलिए शरीर के संकेतों को समझते हुए और आसपास की परिस्थितियों का ध्यान रखकर वर्कआउट करना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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