September 03, 2026

दवाएं हो रहीं बेअसर आम इन्फेक्शन भी बन रहा जानलेवा

भारत में एंटीबायोटिक दवाओं के खिलाफ बढ़ती बैक्टीरिया की प्रतिरोधक क्षमता यानी एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) से जुड़े एक बड़े अध्ययन में सामने आया है कि दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरियल संक्रमण वाले मरीजों में मृत्यु का जोखिम अधिक होने के साथ इलाज का खर्च और अस्पताल में रहने की अवधि भी बढ़ सकती है।

यह अध्ययन देश के 20 टर्शियरी केयर अस्पतालों में भर्ती 1,59,336 मरीजों के डेटा पर आधारित है। अप्रैल 2022 से अप्रैल 2025 के बीच जुटाए गए आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोध में विशेष रूप से चार प्रमुख Gram-negative बैक्टीरिया—E. coli, Klebsiella pneumoniae, Acinetobacter baumannii और Pseudomonas aeruginosa—से होने वाले संक्रमणों को देखा गया।

26 हजार से ज्यादा मरीजों में मिले चार प्रमुख बैक्टीरिया कुल मरीजों में 26,213 ऐसे थे जिनमें इन चार प्रमुख बैक्टीरिया के कारण संक्रमण पाया गया। चिंता की बात यह रही कि अध्ययन में शामिल इन संक्रमणों में 61.1 प्रतिशत कार्बापेनेम-रेजिस्टेंट पाए गए। कार्बापेनेम एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल कई गंभीर बैक्टीरियल संक्रमणों के इलाज में किया जाता है। जब बैक्टीरिया इनके खिलाफ भी प्रतिरोध विकसित कर लेते हैं तो डॉक्टरों के पास प्रभावी दवाओं के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

दवा-प्रतिरोधी संक्रमण में मृत्यु दर अधिक अध्ययन में एक ही बैक्टीरिया के दवा-प्रतिरोधी और दवा-संवेदनशील संक्रमण वाले मरीजों के परिणामों की तुलना की गई। Klebsiella pneumoniae के कार्बापेनेम-रेजिस्टेंट संक्रमण वाले मरीजों में मृत्यु दर 31.2 प्रतिशत रही, जबकि दवा-संवेदनशील संक्रमण में यह 23.5 प्रतिशत थी। E. coli के मामले में प्रतिरोधी संक्रमण वाले मरीजों में मृत्यु दर 24.4 प्रतिशत रही, जबकि दवा-संवेदनशील संक्रमण वाले मरीजों में यह 17.3 प्रतिशत थी।

इसी तरह Acinetobacter baumannii के प्रतिरोधी संक्रमण में मृत्यु दर 37.9 प्रतिशत और संवेदनशील संक्रमण में 32.8 प्रतिशत दर्ज की गई। Pseudomonas aeruginosa के लिए यह आंकड़ा क्रमशः 28.9 और 20.2 प्रतिशत रहा। इलाज पर भी बढ़ रहा खर्च एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस केवल मरीज की सेहत के लिए ही चुनौती नहीं है बल्कि इससे इलाज का आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। अध्ययन में प्रतिरोधी संक्रमणों के एंटीबायोटिक उपचार की लागत संवेदनशील संक्रमणों के मुकाबले करीब 1.1 से दो गुना तक अधिक पाई गई।

दवा काम नहीं करने पर डॉक्टरों को दूसरे या अधिक महंगे विकल्पों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। कई मामलों में इलाज लंबा चलने और अस्पताल में अधिक दिन भर्ती रहने की जरूरत भी पड़ सकती है। क्यों बेअसर होने लगती हैं एंटीबायोटिक? एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का अर्थ यह नहीं है कि मरीज का शरीर दवा के प्रति प्रतिरोधी हो गया है। वास्तव में बैक्टीरिया में ऐसे बदलाव विकसित हो जाते हैं जिनके कारण पहले असरदार रही एंटीबायोटिक उन्हें खत्म नहीं कर पाती। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेना, डॉक्टर की सलाह के बिना दवा इस्तेमाल करना, गलत एंटीबायोटिक चुनना और संक्रमण नियंत्रण में कमियां AMR की समस्या को बढ़ा सकती हैं। सर्दी-जुकाम में खुद से एंटीबायोटिक लेना ठीक नहीं आम लोगों के लिए सबसे जरूरी संदेश यह है कि हर बुखार, सर्दी-जुकाम या गले की समस्या में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं होती। कई सामान्य संक्रमण वायरस के कारण होते हैं और वायरल संक्रमणों पर एंटीबायोटिक काम नहीं करती। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक शुरू करना नुकसानदेह हो सकता है। डॉक्टर द्वारा दवा दिए जाने पर उसे निर्धारित खुराक और अवधि के अनुसार ही लेना चाहिए। अस्पतालों में संक्रमण रोकना भी जरूरी ICMR से जुड़ी वरिष्ठ वैज्ञानिक और अध्ययन की सह-लेखक डॉ. कामिनी वालिया के मुताबिक समस्या का समाधान केवल ज्यादा शक्तिशाली एंटीबायोटिक खोजने में नहीं है। संक्रमण की रोकथाम, समय पर जांच और एंटीबायोटिक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल भी जरूरी है।

अस्पतालों में हाथों की स्वच्छता, उपकरणों की उचित सफाई, संक्रमण नियंत्रण और मरीज में संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया की जल्द पहचान से दवा-प्रतिरोधी संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद मिल सकती है। आम इन्फेक्शन कब बन सकता है गंभीर? E. coli और Klebsiella जैसे बैक्टीरिया पेशाब की नली, फेफड़ों, घाव और रक्त सहित शरीर के अलग-अलग हिस्सों में संक्रमण पैदा कर सकते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि इन बैक्टीरिया से होने वाला हर संक्रमण जानलेवा है। खतरा विशेष रूप से तब बढ़ सकता है जब संक्रमण गंभीर हो, मरीज पहले से कमजोर या गंभीर रूप से बीमार हो और संक्रमण पैदा करने वाला बैक्टीरिया प्रमुख एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी हो। भारत के लिए बड़ी चेतावनी ICMR का अध्ययन बताता है कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस भविष्य का खतरा भर नहीं है बल्कि अस्पतालों में इसका प्रभाव अभी दिखाई दे रहा है। दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों में अधिक मृत्यु दर, लंबा अस्पताल प्रवास और ज्यादा उपचार लागत स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। इस समस्या से निपटने के लिए एंटीबायोटिक का जिम्मेदारी से इस्तेमाल, तेजी से संक्रमण की पहचान, अस्पतालों में मजबूत संक्रमण नियंत्रण और लगातार निगरानी बेहद जरूरी है। आम लोगों के स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण कदम यही है कि एंटीबायोटिक को सामान्य दवा समझकर खुद से न लिया जाए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इसका इस्तेमाल किया जाए।

Advertisement








Tranding News

Get In Touch

hindnesri24news@gmail.com

Follow Us

© Hind Kesari24. All Rights Reserved.