September 08, 2026

रेज ऑफ बिलीफ लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में सपाट स्तर पर शुरुआत कर अपने आईपीओ निवेशकों को निराश कर दिया।

नई दिल्ली, 08 सितंबर। मॉम्स बिलीफ ब्रैंड नेम से ऑटिज्म और एडीएचडी पीड़ित बच्चों के लिए थेरेपी और मेडिकेयर सुविधा उपलब्ध कराने वाली कंपनी रेज ऑफ बिलीफ लिमिटेड के शेयरों ने आज स्टॉक मार्केट में सपाट स्तर पर शुरुआत कर अपने आईपीओ निवेशकों को निराश कर दिया। आईपीओ के तहत कंपनी के शेयर 239 रुपये के भाव पर जारी किए गए थे। आज बीएसई और एनएसई पर इसकी लिस्टिंग बिना किसी बदलाव के 239 रुपये के स्तर पर ही हुई।

फ्लैट लिस्टिंग के बाद बिकवाली का दबाव बन जाने के कारण इस शेयर की चाल में गिरावट आ गई। बिकवाली के दबाव की वजह से ये शेयर गिर कर 228 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि खरीदार दिन के कारोबार के दौरान बीच बीच में खरीदारी का जोर बना कर इस शेयर को सहारा देने की कोशिश करते रहे, लेकिन बिकवाली का दबाव इतना अधिक था कि खरीदारों की कोई कोशिश सफल नहीं हो सकी। पूरे दिन के कारोबार के बाद ये शेयर 228.25 रुपये के स्तर पर बंद हुए। इस तरह पहले दिन के कारोबार में कंपनी के आईपीओ निवेशकों को प्रति शेयर 10.75 रुपये यानी 4.50 प्रतिशत का नुकसान हो गया।

इस कंपनी का 125 करोड़ रुपये का आईपीओ एक से तीन सितंबर के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों की ओर से अच्छा रिस्पॉन्स मिला था, जिसके कारण ये ओवरऑल 107.71 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (क्यूआईबी) के लिए रिजर्व पोर्शन 9.01 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसी तरह नॉन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (एनआईआई) के लिए रिजर्व पोर्शन में 279.11 गुना सब्सक्रिप्शन आया था। इसके अलावा रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए रिजर्व पोर्शन 195.86 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 52.30 लाख नए शेयर जारी किए गए हैं। आईपीओ में शेयरों की बिक्री से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल कंपनी पुराने कर्ज के बोझ को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, आईपीओ से जुड़े खर्चों की भरपाई करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

रेज ऑफ बिलीफ की वित्तीय स्थिति की बात करें तो कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास जमा कराए गए ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में किए गए दावे के मुताबिक इसकी वित्तीय सेहत मामूली उतार चढ़ाव के बावजूद मजबूत बनी रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 85 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था, जो अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 5.88 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में ये फिसल कर 4.96 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इस दौरान कंपनी की राजस्व प्राप्ति में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में इसे 30.76 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़ कर 36.54 करोड़ रुपये और 2025-26 में उछल कर 82.06 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

कंपनी पर लदे कर्ज के बोझ की बात करें तो वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त थी। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी पर 4.36 करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ आ गया। इसके अगले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस वित्त वर्ष के दौरान कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ थोड़ा कम होकर 3.61 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

कंपनी का रिजर्व और सरप्लस भी इस अवधि में लगातार बढ़ता गया। वित्त वर्ष 2023-24 के अंत में कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 5.78 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो वित्त वर्ष वित्त वर्ष 2024-25 में उछल कर 15.02 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह अगर पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो इस साल कंपनी का रिजर्व और सरप्लस 15.22 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

इस अवधि में कंपनी के नेटवर्थ में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी का नेटवर्थ 5.78 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 15.02 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया। वहीं पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का नेटवर्थ दोगुने से अधिक की उछाल के साथ 30.81 करोड़ रुपये के स्तर पर आ गया।

इसी तरह ईबीआईटीडीए (अर्निंग बिफोर इंट्रेस्ट, टैक्सेज, डिप्रेशिएशंस एंड एमॉर्टाइजेशन) 2023-24 में 1.49 करोड़ रुपये के स्तर पर था, जो 2024-25 में बढ़ कर 3.02 करोड़ रुपये के स्तर पर और पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में 11.91 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।

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