October 09, 2026

दिल्ली में प्रदूषण पर सख्ती, धूल नियंत्रण में लापरवाही पर डीजेबी, एनएचएआई, डीएमआरसी और एनबीसीसी को नोटिस

नई दिल्ली, 09 अक्टूबर । दिल्ली में सर्दियों से पहले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने निर्माण स्थलों पर निगरानी तेज कर दी है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) की ओर से सरकारी और निजी परियोजनाओं का नियमित एवं औचक निरीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान धूल नियंत्रण के निर्धारित उपायों का पालन नहीं पाए जाने पर दिल्ली जल बोर्ड, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), दिल्ली मेट्रो और नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनबीसीसी) से जुड़ी कुछ परियोजनाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण नियंत्रण के नियम सभी सरकारी और निजी एजेंसियों के लिए समान हैं। किसी भी विभाग, निर्माण एजेंसी, ठेकेदार या निजी कंपनी को नियमों के उल्लंघन पर छूट नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता दिल्लीवासियों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना है। विकास कार्य जारी रहें, लेकिन पर्यावरणीय मानकों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।

डीपीसीसी के निरीक्षण में पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड के सीवर लाइन बिछाने के कार्य में धूल नियंत्रण संबंधी उपायों की जांच की गई। इसके अलावा एनएचएआई के अंतर्गत एनएच-9 और रोहतक रोड पर पंजाबी बाग से टिकरी कलां तक 17.2 किलोमीटर लंबे गलियारे में, विशेषकर मुंडका मेट्रो स्टेशन और मुंडका औद्योगिक क्षेत्र के आसपास निरीक्षण किया गया।

केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशन पर कृषि भवन के निकट गेट नंबर-3 के पास दिल्ली मेट्रो एवं सेंट्रल विस्टा परियोजना से संबंधित कार्य तथा सरोजिनी नगर और नेताजी नगर में एनबीसीसी की जीपीआरए परियोजनाओं के स्थलों पर भी धूल नियंत्रण के उपायों की जांच की गई। निरीक्षण के दौरान निर्धारित मानकों के अनुपालन में कमियां पाए जाने पर संबंधित परियोजना एजेंसियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

दिल्ली सरकार के अनुसार, उल्लंघन की प्रकृति और गंभीरता के आधार पर निर्माण कार्य रोकने, बिजली आपूर्ति काटने और लागू प्रावधानों के तहत पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां नियमों का पालन किया जा रहा है, वहां निर्माण कार्यों में बाधा डालने का उद्देश्य नहीं है, लेकिन उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि सरकार शीतकालीन प्रदूषण कार्ययोजना के तहत प्रदूषण के स्रोतों पर समय रहते नियंत्रण स्थापित करने पर जोर दे रही है। एक अक्टूबर से वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ पहल भी मिशन मोड में लागू की गई है। इसके साथ ही वाहन उत्सर्जन, सड़क और निर्माण स्थलों की धूल, औद्योगिक प्रदूषण, कचरा एवं जैविक अवशेष जलाने और प्रदूषण हॉटस्पॉट पर कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण को प्रभावी बनाने के लिए एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से तकनीक आधारित निगरानी मजबूत की गई है। वास्तविक समय में प्राप्त प्रदूषण संबंधी जानकारी के आधार पर जमीनी स्तर पर कार्रवाई करने और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया जा रहा है।

निर्माण एजेंसियों को सामग्री और मलबे को ढककर रखने, नियमित पानी का छिड़काव करने, आवश्यकतानुसार एंटी-स्मॉग गन लगाने और उनका संचालन सुनिश्चित करने तथा धूल फैलने से रोकने के लिए अवरोधक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही धूल निगरानी पोर्टल पर पंजीकरण और निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन करना भी अनिवार्य है।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि निर्माण स्थलों से उठने वाली धूल को नियंत्रित करना सरकार की प्रदूषण नियंत्रण रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। डीपीसीसी लगातार निरीक्षण कर रही है और नियमों का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों को जवाबदेह बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकारी परियोजनाओं में भी नियमों का उल्लंघन मिलने पर निजी परियोजनाओं की तरह कार्रवाई होगी। दिल्ली की हवा और नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोपरि है तथा नियमों के पालन में किसी को विशेष छूट नहीं दी जाएगी।

Related Post

Advertisement








Tranding News

Get In Touch

[email protected]

Follow Us

© Hind Kesari24. All Rights Reserved.